Smart Meter हाल ही में भारत के कई राज्यों शहरो और गांव में एक नई बहस ने जोर पकड़ा है बिना पूछे बिजली विभाग ने पुराना मीटर हटाकर नया smart miter लगा दिया गया है अब लोग सोशल मीडिया पर गुस्सा जता रहे हैं, कई जगहों पर धरना प्रदर्शन हो रहे हैं और सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों जनता की राय लिए बिना ये मीटर बदले जा रहे हैं कुछ उपभोक्ता कह रहे हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका बिल अचानक बढ़ गया है
तो कुछ लोग इसे “निगरानी का नया तरीका बता रहे हैं वहीं सरकार और बिजली कंपनियाँ दावा कर रही हैं कि यह मीटर Transparency लाएंगे उनका कहना है कि इस बिजली चोरी रोकेंगे और भारत को स्मार्ट एनर्जी सिस्टम की तरफ ले जाएंगे।तो आखिर सच्चाई क्या है? क्या स्मार्ट मीटर वास्तव में फायदे का सौदा हैं या फिर यह आम उपभोक्ता के लिए सिरदर्द बनने वाले हैं? यही समझने no की कोशिश हम इस ब्लॉग में करेंगे
Smart Meter क्या है और कैसे काम करता है? What is Smart Meter and how does it work?
आम तौर पर बिजली मीटर केवल यह बताते हैं कि आपने कितनी यूनिट बिजली का इस्तेमाल किया है। हर महीने मीटर रीडिंग लेने वाला कर्मचारी आता है नोट करता है और फिर बिल बनाकर आपके घर भेजा जाता है लेकिन Smart meter में ऐसा नही है यह एक डिजिटल डिवाइस है जो न सिर्फ बिजली की खपत को मापता है, बल्कि उसे सीधे बिजली कंपनी के सर्वर पर रियल टाइम में भेज देता है।
Key features of smart meters
- 1. Smart meter जहा पहले की मीटर की रीडिंग लेने के लिए घर आप बिजली विभाग का कर्मचारी आता था और रीडिंग लेके बिल बता देता था लेकिन कई बार गलत रेडिंग यह गलत कैलुलेशन की वजह से बिल ज्यादा आ जाता था या कई बार तो महीनो महीनो तक बिल ही नही अति थी लेकिन इस Smart meter में यह जांझट खतम कर दी है यह ऑटोमेटिक रेडिंग डिटेक्ट करता है और कंपनियों को भेज देता है आपने कितनी यूनिट का इस्तेमाल किया है
- 2. Smart meter में पहले रिचार्ज करना होता है यह एक प्रीपेड सिस्टम है बिल्कुल आपके मोबाइल की तरह होता है जिसमे आप अपना रिचार्ज करते है और बिजली आपके घर मे चलती है रिचार्ज खतम होने पर बिजली काट दी जाती है इससे बिजली चोरी की समस्या खत्म होती है
- 3. Smart meter में आपको real time tracking देखने को मिलती है जिससे कंपनिया दूर से ही आपके मीटर को कंट्रोल कर सकती है ओह जब चाहे बिजली on ya off कर सकती है रियल टाइम ट्रैकिंग एक और फायदा उपभोक्ता को यह मिलता है की ओह आसानी से अपने बिजली खपत को देख सकता है जिससे ट्रांसप्रेंसी को बढ़ावा मिलता है इसके अलावा अगर कोई मीटर से कोई छेड़ छाड़ करता है तो तुरंत चोरी पकड़ी जा सकती है
How a smart meter works
Smart meter में एक सिम कार्ड जैसी डिवाइस होती है जो GPRS 4G मॉड्यूल पर काम करता है इससे करंट लोकेशन पता चलती है यानी आप मीटर को कही लेकर नही जा सकते है साथ ही इसमें आपकी यूनिट की खपत को यह हर 15 मिनट यह हर घंटा आपकी रीडिंग कंपनी को भेजता है
इस Smart meter से आप अपनी खपत को मोबाइल ऐप यह साइट पर जाकर अपने यूनिट खपत को मॉनिटर कर सकते है
जब स्मार्ट मीटर इतना अच्छा है तो लोग इसे लगवाने से मना क्यों कर रहे हैं?
Smart meter देखने और सुनने में तो बहुत आधुनिक और फायदेमंद दिखाई देते है बिजली विभाग तो कहता है की यह पारदर्शिता लता है जो सालाना हजारों करोड़ों का नुकसान बिजली चोरी से होता है यह उसको रुकता है और उपभोगता को रीयल टाइम डेटा देता है
इतने फायदे होने के बाद भी आम जनता इसको लगवाने से साफ से मना कर रहे है और इसका विरोध सोसल मीडिया ओर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिला है झारखंड राजिस्थान और उत्तरप्रदेश में इसका विरोध और बड़े स्तर पर देखने को मिला।है आखिर क्यों?
1. भरोसे की कमी और पारदर्शिता बनाम प्राइवेसी
भारत में Smart meter न लगवाने की सबसे बड़ी वजह है भरोसे की कमी भारत में बिजली विभाग और डिस्कॉम्स (DISCOMs) छवि बहुत अच्छी नहीं रही है लोगो का मानना है कि कंपनिया और विभाग अक्सर बिल में गड़बड़ी, ओवरचार्जिंग, और तकनीकी खराबी के लिए बदनाम है इसलिए आप जनता इस Smart meter पर भरोसा नहीं कर रही है
कई लोगो का यह मानना है कि जो हम बिजली इस्तेमाल करेंगे उसका देता यह मीटर सरकार और कंपनियों को देता है इससे यह पता चल सकता है की हम कब बिजली उपयोग कर रहे है और कब नही साथ यह भी पता लगाया जा सकता है
हम किस समय घर पर होते और कब नही आपके पास कौन कौन से उपकरण है सारा कुछ डेटा दुसरो को मिल सकता है इस तरह की निगरानी से लोग का कहना है कि उनकी प्राइवेसी को खतरा है
2. अचानक बिल बढ़ने का डर और तकनीकी गड़बड़ी का डर
अगर देखा जाए तो आम जनता का विरोध करने की सबसे बड़ी वजह यह है कि अचानक बिल बढ़ कर आना बहुत से उपभोक्ता सोसल मीडिया पर इसको ले कर शिकायत कर चुके है की Smart meter लगने से उनके बिजली पहले बहुत ज्यादा आने लगे है
और यह बात बिलकुल सच है कि बिजली के बिल ज्यादा आने लगे है अब बिजली विभाग का इस पर कहना है कि लोगो का जो रियल खपत है वह सामने आ रही है इसी वजह से लोगो को बिल ज्यादा लगने लगा है लेकिन यह जनता की नजर में सबसे बड़ा नकारात्मक पहलू है
भारत के कई गांव और छोटे कस्बों में नेटवर्क प्रॉब्लम होना यह एक आम समस्या है अब वह लोग सोचते है की Smart meter पूरी तरह नेटवर्क पर काम करता है अगर वह डाउन हुआ तो बिजली भी कट जायेगी जहा पहले ही इन जगहों पर बिजली कटौती से लोग परेशान थे वही लोगो का कहना है कि यह और ना मुस्किल बड़ा दे
3. बिना अनुमति इंस्टॉलेशन और प्रीपेड सिस्टम की चिंता
Smart meter को लेकर लोगो में गुस्सा इस लिए भी है उनको कोई opption ही नहीं दिया जाता है और नही पूछा जाता है की वह स्मार्ट मीटर लगवान चाहते है यह नही और नही कोई कागजी सहमति ली गई है बिजली विभाग की तरफ से अचानक बिजली विभाग के कई कर्मचारी आते है और पुराना मीटर बदल देते है
और कई जगहों पर तो जबरन लगाया जा रहा है लेकिन यह तरीका तो लोकतांत्रिक नही लगता है और लोगो का कहना है कि हमारी कोई अहमियत ही नहीं है इसकी वीडियो और फोटो फेसबुक इंस्टाग्राम और एक्स पर वायरल है
भारत में बिजली हमेशा प्रीपेड रहे है महीने के लास्ट में जो भी बिजली बिल आता था लोग उसको भुक्तान करते थे लेकिन Smart meter की यह सबसे बड़ा पहलू है प्रीपेड सिस्टम लाना यानी पहले रिचार्ज करो फिर इस्तेमाल करो
गरीब और मधियावर्ग के लोगो का डर है कि यह बोझ बड़ा देगा जैसे आपके मोबाइल में रिचार्ज खतम होते है काल इंटरनेट सब कुछ बंद हो जाता है ठीक इसमें भी ऐसा ही है रिचार्ज खतम बिजली कट हो जायेगी
4. . पुरानी आदतें और बदलाव का डर
अगर देखा जाए तो आम जनता किसी भी बड़े बदलाव को आसानी से नहीं accept नही करती है पुराने मीटर के साथ लोग कई दसको से जी रहे है अब अचानक से नया डिजिटल सिस्टम आ जाए जिसमे बिलिंग पेमेंट और निगरानी सब बदल जाए तो स्वाभाविक है कि लोग आशंकित हों और बदलाव से बचें
साथ ही नया मीटर लगाने से पहले कंपनियों को यह बताना जरूरी है लोगो की क्या काम करेगा यह Smart meter और बिजली विभाग को इसपर कुछ बदलाव करना जरूरी है जैसे की महीने के लास्ट में बिजली का बिल लेना स्मार्ट मीटर लगाने से पहले लोगो से यह जानना की क्या ओह इसको लगवाना चाहते है यह नही
Smart meter लगवाने की सरकारी पहल और कंपनियों की भूमिका
भारत सरकार ने 2019 से ही Smart meter नेशनल प्रोग्राम (SMNP) शुरू किया था इसका लक्ष्य था की 2025 तक देश के सभी 25 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर दिए जाएँ लेकिन इसका उल्टा हो रहा है लोग लगवाने को तैयार ही नही है
कौन-कौन सी कंपनियाँ लगा रही हैं स्मार्ट मीटर?
सरकार ने कई निजी और सरकारी कंपनियों को यह काम सौंपा है। इनमें Energy Efficiency Services Limited (EESL) Tata Power, Genus Power, Secure Meters, IntelliSmart जैसी कंपनियाँ प्रमुख हैं ये कंपनियाँ टेंडर लेकर स्मार्ट मीटर सप्लाई करती हैं और राज्य सरकारों के बिजली बोर्ड (जैसे यूपीपीसीएल, बीएसईएस, झारखंड बिजली वितरण निगम आदि) इनका इंस्टॉलेशन करवाते हैं
किसके आदेश पर लग रहे हैं स्मार्ट मीटर?
भारत में Smart meter लगाने का काम केंद्र सरकार के आदेश और योजना के तहत किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्रालय ने 2019 में स्मार्ट मीटर नेशनल प्रोग्राम (SMNP) की शुरुआत की थी और इसके बाद 2021 में रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) लॉन्च की गई।
इस योजना के तहत 2025 तक देश के सभी बिजली उपभोक्ताओं के पारंपरिक मीटर को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाया जाना है। इस काम की जिम्मेदारी राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को दी गई है,
जबकि फंडिंग और आदेश केंद्र सरकार से आते हैं। स्मार्ट मीटर लगाने का असली मकसद बिजली चोरी पर रोक लगाना, बिलिंग में पारदर्शिता लाना और उपभोक्ताओं को रियल-टाइम खपत की जानकारी उपलब्ध कराना है।
विदेशों में स्मार्ट मीटर का अनुभव और भारत के लिए सबक
स्मार्ट मीटर कोई नई तकनीक नहीं है। यूरोप,अमेरिका,चीन और कई विकसित देशों में यह पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं भारत अभी इस सफर की शुरुआत कर रहा है ऐसे में ज़रूरी है कि हम देखें कि विदेशों में यह प्रयोग कितना सफल हुआ और वहाँ से हमें क्या सीख मिल सकती है
अमेरिका और चीन के लोगो अनुभवों के हिसाब से यह साफ़ होता है कि स्मार्ट मीटर लगने पर शुरुआती दौर में लगभग हर जगह विरोध हुआ है अमेरिका में टेक्सास और कैलिफ़ोर्निया जैसे राज्यों में लोगों ने बिल बढ़ने की शिकायत की, लेकिन जब उपभोक्ताओं ने ऐप और ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी रियल-टाइम खपत देखनी शुरू की और एनर्जी एफ़िशिएंट उपकरण अपनाए,
तो धीरे-धीरे उन्हें इसका फायदा दिखने लगा। दूसरी ओर, चीन ने बिल्कुल अलग रास्ता अपनाया। वहाँ सरकार ने उपभोक्ताओं से राय लेने के बजाय सीधे आदेश जारी कर दिए और बहुत तेज़ी से पूरे देश में स्मार्ट मीटर इंस्टॉल कर दिए
शुरू में शिकायतें आईं, लेकिन चीन के सख़्त प्रशासन और जनता के पास विकल्पों की कमी के कारण विरोध ज़्यादा लंबा नहीं चला और आज चीन दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्ट मीटर मार्केट बन चुका है। यह तुलना बताती है कि चाहे लोकतांत्रिक व्यवस्था हो या केंद्रीकृत, स्मार्ट मीटर को स्वीकार करने में जनता का भरोसा और सरकार का रवैया दोनों अहम भूमिका निभाते हैं।
भविष्य और भारत की ऊर्जा क्रांति में स्मार्ट मीटर की भूमिका
Smart meter का भविष्य ओर भारत की ऊर्जा क्रांति में अहम भूमिका निभा सकता है, अगर इसे सही ढंग से लागू किया जाए तो तकनीकी रूप से यह मीटर बिजली की खपत को पारदर्शी बनाते हैं, बिजली चोरी रोकते हैं और उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर नियंत्रण देते हैं
और पूरे देश में ऊर्जा बचत की जा सकती है। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि जनता को पहले से जागरूक किया जाए, उनके भरोसे को मजबूत किया जाए और प्राइवेसी सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण और गरीब उपभोक्ताओं के लिए विकल्प बनाए जाएँ ताकि वे पोस्टपेड या प्रीपेड सिस्टम में से चुन सकें
अगर यह सब किया गया, तो स्मार्ट मीटर न केवल बिजली Distribution में सुधार करेंगे बल्कि उपभोक्ताओं को उनके खर्च और खपत पर नियंत्रण देने के साथ साथ देश के ऊर्जा संसाधनों का आसानी से उपयोग भी कर सकेंगे इस प्रकार, का Smart meter में न केवल तकनीकी रोप का प्रतीक बन सकते हैं बल्कि एक सीधा और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की नींव भी रख सकते हैं
निष्कर्ष
बिना पूछे बदल गए मीटर से लोगो में विवाद और अहसहमियत पैदा हुई है लेकिन देखा जाए तो यह बदलाव तकनीकी और आर्थिक रूप से जरूरी भी है हाला की इसमें सफल होने के लिए प्राइवेसी को सही करना और जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है विदेशों के अनुभव यह दिखाते हैं कि तकनीक चाहे कितनी भी अच्छी क्यों न हो, जनता के सहयोग और सरकारी पारदर्शिता के बिना उसका सही फायदा नहीं उठाया जा सकता।भारत में स्मार्ट मीटर के सही
भारत में Smart meter सही तरीके से लगने से सरकार को फायदा मिलेगा और उपभोक्ता को भी अपने बिल को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी
