India Renewable Energy 2025 की पहली छमाही में ही India renewable energy sector में $11.8 billion का निवेश देखने को मिला है , जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आधे साल का निवेश है। इस निवेश में सबसे ज्यादा योगदान solar energy investment India में रहा, जो कुल निवेश का लगभग 77% है। शेष हिस्सा wind, hydro और biomass projects में गया।
इससे पता चलता है कि भारत न केवल अपने ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है बल्कि विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा भी लगातार जीत रहा है। इससे निवास्को को एक भरोसे मंद बाजार मिल गया है इस निवेश से न केवल ऊर्जा उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी बल्कि भारत के carbon emission reduction targets को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
India Renewable Energy 2025 भारत में Renewable Energy Investment क्यों बढ़ रहा है?
भारत 2025 में Renewable Energy के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और निवेशक भी अब इस सेक्टर में बड़ी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है सरकार का साफ लक्ष्य — 2030 तक 500 GW उर्जा क्षमता तैयार करना। इसी वजह से Solar, wind, battery स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे प्रोजेक्ट्स को भारी बढ़ावा मिल रहा है।
पहले जो कोयले से बिजली बनती थी वह बहुत ही मंहगी होती थी लेकिन आज के समय में सौर ऊर्जा से बनने वाली बिजली सस्ती होती है यही वजह है कि कंपनियों और निवेशकों को यहाँ लंबा फायदा दिख रहा है। सरकार की ओर से PLI स्कीम, टैक्स बेनिफिट और DFI की फंडिंग ने भी निवेश के माहौल को और मज़बूत कर दिया है।
ताज़ा रिपोर्ट्स और खबरों की माने तो अगले दो सालों में भारत में करीब ₹3.8 लाख करोड़ का नया निवेश Renewable Energy में आएगा और लगभग 75 GW नई क्षमता जुड़ेगी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा हाइब्रिड और स्टोरेज-लिंक्ड प्रोजेक्ट्स का होगा। यही वजह है कि 2025 में भारत Renewable Energy Investment का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन रहा है।
Government goals and policy support
India Renewable Energy 2025 में निवेश बढ़ने का सबसे बड़ी वजह है सरकार की साफ और मजबूत विज़न भारत सरकार का विज़न है कि 2030 तक देश में 500 GW कि क्षमता तैयार करनी है। इसी मिशन को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने Production Linked Incentive (PLI) स्कीम लाई गई है,
जिसके तहत सोलर Module और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को भारी बढ़ावा मिल रहा है। इसके साथ ही टैक्स बेनिफिट, आसान फाइनेंसिंग और ग्रिड-लिंक्ड सपोर्ट ने निवेशकों को और भी भरोसा दिया है। 2025 में सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर भी खास फोकस किया है,
जिसका मकसद है 2030 तक हर साल 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करना। यह कदम सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि भारत को दुनिया का ग्रीन हब बनाने की दिशा में बड़ा योगदान देगा। यही वजह है कि भारत की साफ और मजबूत नीतियां invester को भरोसा दिला रही है कि अब भारत का india Renewable Energy सेक्टर लंबे समय तक टिकाऊ और फ़ायदेमंद रहेगा।
Production Linked Incentive (PLI) Scheme क्या है और india Renewable Energy में इसका क्या Roll है?
भारत में Renewable Energy निवेश बढ़ाने में PLI स्कीम ने गेम-चेंजर का काम किया है। इस योजना के तहत सरकार घरेलू स्तर पर सोलर मॉड्यूल, लिथियम आयन बैटरी और ग्रीन एनर्जी उपकरण बनाने वाली कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन देती है। इसका फायदा यह हुआ कि बड़ी-बड़ी कंपनियाँ अब चीन पर निर्भर रहने के बजाय भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा रही हैं।
2025 तक PLI स्कीम के जरिए 40 गीगावॉट हाई-एफिशियेंसी सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता हासिल करने का टारगेट रखा गया है। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि भारत सौर पैनल एक्सपोर्ट करने वाले देशों की सूची में भी शामिल होने की ओर बढ़ रहा है। PLI स्कीम निवेशकों को यह भरोसा देती है कि India Renewable Energy सेक्टर अब आत्मनिर्भर भी है और लंबे समय तक टिकाऊ भी रहेगा।
Tax benefits and affordable financing in India renewable energy क्या है?
भारत सरकार Renewable Energy सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए Tax benefits और आसान फाइनेंसिंग पर ज़ोर दे रही है। सोलर और wind project और Accelerated Depreciation (AD) का फायदा कंपनियों को मिलता है,
जिससे उनकी इनकम टैक्स की देनदारी कम हो जाती है और शुरुआती निवेश का बोझ हल्का होता है। इसके अलावा इस Schcme से GST में भी छूट मिलती है कस्टम ड्यूटी काम होती है और Solar product कि कीमत्तों और कम टैक्स ने भी लोगो का ध्यान अपनी तरफ खींचा है
फाइनेंसिंग की बात करें तो सरकार ने IREDA (India Renewable Energy Development Agency) जैसे संस्थानों के जरिए Renewable Projects को बड़ावा देने के लिए लो-इंटरेस्ट लोन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।
और कई पब्लिक सेक्टर बैंक और प्राइवेट NBFC भी ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए स्पेशल क्रेडिट लाइन बना रहे हैं। 2025 में तो भारत ने ग्रीन बॉन्ड्स और सस्टेनेबल फाइनेंसिंग को और मजबूती दी है, जिससे विदेशी निवेशकों को भरोसा मिल रहा है और वह ज्यादा से ज्यादा इन्वेस्ट कर रहे है
इन सब कदमों का सीधा असर यह हुआ है कि अब छोटे और बड़े दोनों स्तर के Renewable Energy प्रोजेक्ट्स की लागत काफी हद तक कम हो गई है। निवेशकों को सस्ती फाइनेंसिंग और टैक्स से राहत मिलने से उनका इंटरेस्ट और इन्वेस्टमेंट दोनो बढ़ रहा है यही वजह है कि 2025 में India Renewable Energy निवेश तेज़ी से ऊपर जा रहा है और आने वाले सालों में यह ट्रेंड और मजबूत होगा।
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है?
भारत में Renewable Energy निवेश बढ़ने का एक और बड़ा कारण है ग्रीन हाइड्रोजन मिशन। सरकार ने 2023 में इस मिशन की शुरुआत की थी और 2025 तक इसे तेजी से बढ़ावा दिया है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य है कि भारत 2030 तक 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करे, जो न सिर्फ घरेलू ज़रूरतें पूरी करेगा बल्कि एक्सपोर्ट में भी भारत को आगे बढ़ाएगा बनाएगा।
India Renewable Energy और ग्रीन हाइड्रोजन का ज्यादा इस्तेमाल स्टील, फर्टिलाइज़र, और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है इससे कार्बन उत्सर्जन घटेगा और भारत को नेट-जीरो टारगेट 2070 हासिल करने में मदद मिलेगी। सरकार इस मिशन के लिए ₹19,744 करोड़ का पैकेज जारी कर चुकी है, जिसमें प्रोडक्शन इंसेंटिव, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट शामिल हैं।
निवेशकों के लिए यह मिशन बेहद आकर्षक है क्योंकि ग्रीन हाइड्रोजन आने वाले दशकों की सबसे बड़ी एनर्जी डिमांड बनने जा रही है। इंटरनेशनल मार्केट में भी इसकी डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है, और भारत कम लागत वाली India Renewable Energy के दम पर इसे सस्ते में बना सकता है। यही वजह है कि आज कई विदेशी कंपनियाँ भी भारत के ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं।
ग्रिड-लिंक्ड सपोर्ट के फायदे क्या है?
India Renewable Energy में निवेश को बढ़ाने के लिए ग्रिड-लिंक्ड सपोर्ट भी अहम रोल निभा रहा है पहले सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि सोलर और विंड जैसी ऊर्जा का उत्पादन मौसम पर निर्भर रहता है और स्टोरेज व ग्रिड कनेक्शन की कमी के कारण पावर वेस्ट हो जाती थी। लेकिन अब सरकार और पावर सेक्टर ने मिलकर स्मार्ट ग्रिड, बैटरी स्टोरेज सिस्टम और ट्रांसमिशन नेटवर्क को अपग्रेड करना शुरू कर दिया है।
नए पॉलिसी फ्रेमवर्क और India Renewable Energy के चलते प्लांट्स को नेशनल ग्रिड से सीधे जोड़ा जा रहा है ताकि बिजली की सप्लाई 24×7 लगातार और हमेशा रहे इससे न सिर्फ बिजली कंपनियों को फायदा मिलता है बल्कि निवेशक भी बिना रिस्क के पैसा लगाने के लिए तैयार होते हैं।
साथ ही, “वन नेशन वन ग्रिड” की दिशा में उठाए गए कदमों ने India Renewable Energy सेक्टर को और मजबूत बना दिया है। 2025 तक भारत में बड़े पैमाने पर हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे सोलर और विंड पावर को लंबी दूरी तक ले जाना आसान हो जाएगा।

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