बैटरी टैक्नोलॉजी कैसे बदल रही है भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की मांग बहुत तेज़ी से बढ़ रहे है लेकिन इसका सीधा असर बैटरी टैक्नोलॉजी पर पढ़ रहा है जैसे जैसे बैटरियां पहले से ज्यादा strong सस्ती और टिकाऊ हो रही है electric vehicle (EVc) आम लोगो के पहूंच में आ रहा है यह बदलाव सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर तक ही सीमित नहीं है यह भारत के भविष्य में काफी योगदान दे रहा है बैटरी टैक्नोलॉजी से पर्यावरण को दोषित होने की मात्रा कम किया जा सकती है आज के इस लेख में हम जानेंगे की बैटरी टैक्नोलॉजी और (EVs) से हमको क्या क्या फायदे और नुकसान है और इसके भविष्य के बारे में समझने की कोसिस करेंगे।
भारत में बैटर टेक्नॉलॉजी की वर्तमान स्थिति(Current status of battery technology in India)
बैटरी टेक्नालॉजी में कुछ वर्षो में काफी बदलाओं आया है इसकी वजह है (EVs) की तरफ लोगो की दिलचस्पी बढ़ रहे है और ऐसा इस लिए हो रहा की आज के समय में इलेट्रिक कारे बहुत ही एडवांस हो गई है बैटरी EV कि रीढ़ की हड्डी ही नही बल्कि परफॉर्मेंस कीमत और सुरछा को भी तय करती है
पहले जहा इलेट्रिक वाहनों में लिथियम आयन बैटरी का उपयोग होता था वही अब इनकी जगह पर solid state battery और sodiyam ion battery अपनी जगह बना रही है Electric vehicle (EV) के लिए आज के समय में सबसे अच्छी बैटरी की बात करे तो बैटरी टैक्नोलॉजी के आधार पर कुछ परमुख्य बैटरिया है
जिन्हे अलग अलग क्षेत्रों में सबसे अच्छा माना जा रहा है नीचे 4 बैटरियों का जिक्र किया गया है जिनकी EV इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा जरूरत और चर्चा है जो आने वाले समय में (EV) सेक्टर को पूरी तरह बदल सकती है
1 लिथियम आयन बैटरी (Li-ion battery)
आज की तारीख में लगभग ज्यादातर गाडियां में lithium ion battery का उपयोग हो रहा है हल्की यह उच्च ऊर्जा वाली होती है तथा यह बार बार चार्ज भी की जा सकती है इनमे (high Energy Density) होती हैं जिनको एक बार चार्ज करने पर वाहन लंबा सफर तय कर सकते है
लेकिन lithium ion battery में कुछ खराबी भी है इन बैटरियों में overheting और आग लगने का खतरा रहता है इनमे लिथियम जैसे पदार्थ का उपयोग होता है जो इन बैट्री को महगा भी बनाते है साथ ही पर्यावरण को चुनौतीपूर्ण बनता है।
2 सॉलिड स्टेट बैटरी(solid-state battery)
इन बैटरों को फ्यूचर की सबसे भरोसेमंद बैटरी माना जा रहा है जहा दूसरी बैटरी में एलिट्रोलाइट का उपयोग होता है वही इस बैटरी को बनाने में सॉलिड मैटेरियल का इस्तेमाल होता है जो इसके नाम से पता चलता है यह बैटरियां ज्यादा सुरक्षित टिकाऊ और तेज़ी से चार्ज होने वाली होती है
यह तकनीक अभी प्रोग्रेस में है और यह अभी बड़े पैमाने पर जब उपलब्ध होगी तो ऐसा माना जा रहा है की यह लीथियम आयन बैटरी की जगह ले सकती है
3 सोडियम आयन बैटरी(sodiyam ion battery)
इन बैटरियों में लिथियम की जगह सोडियम का उपयोग होता है सोडियम धरती पर काफी ज्यादा मात्रा में उपलब्ध है इस लिया यह बैटरियां सस्ती और पर्यावरण अनुकूल होती है और इनको बनाने में भी आसानी होती है आने वाले समय में बैटरी टैक्नोलॉजी के रूप में यह बैट्री उभर सकती है
लेकिन इन बैटरियों में उर्चा घनत्व थोड़ा काम होता है इसकी वजह से इनका इस्तेमाल अभी कम दूरी वाले(EVs) जैसे दो पहिए में ज्यादा होता है भारत जैसे बड़ी EVs मार्किट में यह एक किफैती और बैटरी टैक्नोलॉजी का बेहतरीन ऑप्शन बन सकता है
4 लिथियम फेरो फास्फेट बैटरी(LFP battery)
अभी के समय में tesla, TATA और चाइनीज कंपनिया अपने (EV) में लिथियम फेरो फास्फेट बैटरियों का उपयोग कर रहे है यह बैटरियां अभी बहुत ही लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इन बैटरियां में अधिक तापमान सहनशीलता होती है
और यह बाकी बैट्री के मुकबले सस्ती और टिकाऊ तेज़ चार्जिंग में बेहतर होती है भारत जैसे गरम तापमान में जहा बाकी बैटरियां जल्दी गरम हो जाती है उसमे यह बैट्री एक अच्छा समाधान बन सकती है
बैट्री निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता की शुरुवात(Battery manufacturing is the beginning of India’s self-reliance)
भारत अभी तक लिथियम आयन बैटरी का आयात चीन जापान और कोरिया जैसे देशों से करता रहा है लेकिन भारत सरकार ने नई योजना लेके आई है PLI यानी(Production Linked Incentive) और राष्ट्र निर्माण जैसे कदमों के बाद देश में बैटरी निर्माण और बैटरी टैक्नोलॉजी में बहुत सी कंपनीयों ने निवेश शुरू कर दिया है
Reliance, Tata, Ola Electric, और Amara Raja जैसी कंपनियां अब भारत में ही बैटरी टैक्नोलॉजी की दिशा में काम कर रही है आने वाले कुछ सालो में भारत बैटरी और EV के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है
भारत में बैटरी निर्माण और बैटरी टैक्नोलॉजी की दिशा में बीते कुछ वर्षो में काफी बदलाओं देखने को मिला है वह सिर्फ तकनीक विकास ही नही बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता की ढोस और मजबोत झलक दिख रही है वर्षो तक देश विदेशो पर निर्भर रहा फिर चाहे ओह मोबाइल हो, इनवर्टर और अब इलेक्ट्रिक वाहन EV
लेकिन जैसे जैसे भारत में इलेट्रिक वाहनों की मांग तेज हो रही है ठीक इसी तरह बैटरी निर्माण की समस्या भी गंभीर होती नजर आ रही थी लेकिन सरकार ने इसको समझा और (PLI, FAME-II स्कीम, स्वच्छ ऊर्जा मिशन) जैसी योजना लाई साथ ही इन बैटरी निर्माण कंपनियों को सरकार की तरफ से अधिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है
सरकार की इस योजना के आने के बाद देश की प्रमुख कंपनियों में होड़ से लग गई है हर कोई बैटरी निर्माण के लिए प्लांट लगा रही है यह कंपनिया सिर्फ लिथियम आयन बैटरी ही नही बल्कि सॉलिड स्टेट और अन्य अगली जेनरेशन की बैटरी पर भी काम कर रही है
अब भारत बदल चुका है भारत पहले manufacturing तक ही सीमित था लेकिन अब भारत रीसाइक्लिंग और कच्चे माल कि सोर्सिंग और अन्य स्थानीय चीजों पर काम कर रहा है देश में अब अलग अलग जगहों पर खनिज की पहचान और खुदाई भी तेज हो गई है
बैटरी टैक्नोलॉजी सिर्फ EV तक ही सीमित नहीं है बैटरी सोलर स्टोरेज, डेटा सेंटर, स्मार्ट ग्रेडर्स, डिफेन्स सिस्टम, तक फैल चुकी है भारत 2030 तक बैटरी टैक्नोलॉजी सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भर बन जायेगा
प्रदूषण और उर्जा बचत तथा बैटरी रीसाइक्लिंग का असर(pollution and the impact of energy savings and battery recycling)
हम ने बैटरी टेक्नालॉजी के छेत्र में अपनी पकड़ बना ली है भारत अब (EVs) में भी खुद को मज़बूत बना रहा है लेकिन बैटरी टैक्नोलॉजी के अलावा जिस सेक्टर में हमको अभी ध्यान देने की सख्त जरूरत है और ओह है प्रदूषण और बैटरी रीसाइक्लिंग क्योंकि जैसे जैसे हम बैटरी निर्माण और EV निर्माण में खुद को खड़ा कर रहे है उस्सी तरह इन निर्माण से प्रदूषण भी बड़ेगा
1 प्रदूषण का असर(effect of pollution)
हम जो बैटरी इस्तेमाल करके फेंक देते हैं जो बैटरियां पुरानी हो जाती हैं उसकी वजह से पर्यावरण प्रदूषण के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो रही हैं बैटरी में इस्तेमाल होने वाले केमिकल जैसे लिथियम कोबाल्ट नेकल और मैंगनीज यह धरती में रीस कर मिट्टी और पानी को जहरीला बना सकते है
पुरानी बैटरियों का फेका जाना प्रदूषण को सीधे तौर पर बड़वा देना है जो जल वायु और भू-प्रदूषण तीनों के लिए खतरनाक है इसका एक ही समाधान है की बैटरियों की रिसाइक्लिंग की जय इससे न सिर्फ जहरीले कचरे से बचाओ होता है बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व को दुबारा उपयोग किया जा सकता है
2 ऊर्चा बचत बैटरी निर्माण की चुनौतियां और समाधान( Challenges and solutions for energy saving battery manufacturing)
बैटरी निर्माण में ऊर्जा की बहुत ज्यादा खपत होती है लिथियम नेकल कोबाल्ट और अन्य धातु जो बैटरी बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते है उनकी मीनिंग और प्रोसिंग भी शामिल होती है इन धातुओं को बाहर निकालने के लिए भरी मशीनों और बिजली का उपयोग किया जाता है जिसकी वजह से कार्बन फुटप्रिंट और उर्जा खर्च बहुत बढ़ जाता है
हालाकि बैटरी उत्पादन में जितना खर्च आता है उसका बड़ा हिस्सा कच्चे मॉल और मैनिंग में जाता है इन खर्च को कम करने का एक ही समाधान है बैट्री रीसाइक्लिंग नई लिथियम आयन बैटरी बनने में जितनी ऊर्जा खर्च होती है उसकी तुलना में बैटरी रिसाइलिंग से अवसायक ऊर्जा की खपत 75% काम हो जाती है
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ताजा शोध की मुताबिक बैटरी निर्माण में होने वाले खर्च और उर्जा की बचत होती है बल्कि इससे ग्रेन्हाउस गैसों में भी भारी कमी आती है बैटरी रीसाइक्लिंग से ऊर्जा के साथ साथ इसमें जल का उपयोग कम होता है जल में भी 70% तक बचत हो सकती है
3 रीसाइक्लिंग क्यों है ज़रूरी(Why is recycling important)
भारत तेज़ी से इलेक्ट्रिक, सौर ऊर्जा, और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी टैक्नोलॉजी की ओर बढ़ रहा है जिससे लिथियम जैसे तत्व का उपयोग बढ़ता है लेकिन 95% से अधिक बैटरियां e west और गैर अपचारिक रूप से निपटाई जाति है जिससे जहरीले रसायन प्रायवार्ड और हेल्थ को दूषित करते है इन सब समस्याओं से निपटने का एक ही हाल है रिसाइक्लिंग यह एक अच्छा और टिकाऊ रास्ता है
कचरे में जाने वाले बैटरी मैटेरियल को सुरचित रूप से बाहर निकल और अच्छे से प्रोसेस कर सकते है बैटरी रीसाइक्लिंग से कीमती धातुओं को दुबारा से नई बैटरी बनाने में उपयोग कर सकते है जिससे नई बैटरी की कीमत में गिरावट भी आ सकती है और इससे न सिर्फ पर्यावार्ड को दोषित होने से बचा सकते है बल्कि इससे देश में रोजगार भी बढ़ सकते है
भारत सरकार ने Battery Manegment Rules 2022 लागू किया है जो रीसाइक्लिंग को मजबूती देना का काम कर रही है लेकिन अभी भी इसमें बहुत सा सुधार करना बाकी है
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आपको इसमें कोई कमी नज़र आए तो हम जरूर सजा करे इस लेख में हम बैटरी टैक्नोलॉजी भारत की वर्तमान स्थिति और रीसाइक्लिंग के बारे में हमने चर्चा की है ,
