1.02 Pbps high speed internet

1.02 Pbps! जापान की इंटरनेट क्रांति जिसने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया और भारत कब होगा तैयार?

अभी आप जिस पर यह लेख पढ़ रहे है ओह सिर्फ एक डब्बा होता अगर दुनिया में इंटरनेट न होता तो जहा भारत अभी 5G internet में खुद को ठीक से विकसित नही कर पाया है आज के समय में पूरी दुनिया में नई technology विकसित हो रहे है अभी हाल ही में 1.02 Pbps हाई स्पीड इंटरनेट बनाया है जिसने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है आज के इस लेख में जानेंगे की यह कैसे हुआ 1.02 Pbps क्या है इसका आम इंसान पर क्या असर होगा और भारत कब होगा तैयार इस लेख में हम इसी के बारे में बार करेंगे

1.02Pbps हाई स्पीड इंटरनेट क्या है। यह कैसे काम करता है 2025

जापान जो अपनी टैक्नोलॉजी और नए नए अविष्कार के लिए पूरी दुनिया में फेमस है उसने अभी हाल ही में 1.02 Pbps यानी 1.02 Pbps प्रति सेकेंड का इंटरनेट अविष्कार किया है यह अभी तक का सबसे तेज़ स्पीड वाला इंटरनेट है

इस तकनीक को जापान के NICT (National Institute of Information and Communications Technology) बनाया है उन्होंने इसको एक खास तरह के फाइबर ऑप्टिक सिस्टम का उपयोग करके बनाया है साथ ही इसमें 38 कोर और मॉल्टिवेव का इस्तेमाल किया गया है

Pbps क्या होता है?

Pbps (petabits per second) यह एक डेटा ट्रांसफर यूनिट होती है जिसकी हेल्प से हम अपने डेटा को दूसरे तक भेजते है 1 Pbps = 1,000 terabits par second = 1,000,000 Gigabits per second

यह स्पीड इतनी तेज़ है की हर एक सेकेंड में 1 million GB से भी ज्यादा डेटा इसकी मदद से ट्रांसफर किया जा सकता है अगर आसान भाषा में कहे तो आप इस स्पीड से आप कुछ सेकंड में netfilx, YouTube, और amozon prime का सारा कंटेंट डाउनलोड कर सकते है

Bit क्या होता है?

Bit (Binary dight) यह एक कंप्यूटर भासा है और यह कंप्यूटर की सबसे छोटा हिस्सा होता है यह सिर्फ दो चीजों को दर्शाता है 0 या 1 बस अगर कोई डेटा 101 है तो इसमें 3 bits हुए कंप्यूटर में किसी भी शब्द को देखने के लिए bit की जरूरत होती है जैसे की एक शब्द है A B C अब इसको कंप्यूटर में दिखने के लिए bit ki ज़रूरत होती है

और जब 8 बिट्स एक साथ आते है तो वोह मिलकर 1 byte बनाते है फिर आगे चल कर जब 1000 बिट्स इक्कठा होते है तो ओह एक किलोबाइट्स बनता है जिसको हम KB भी कहते है उसमे हम एक छोटा डॉक्यूमेंट्स रख सकते है इसी तरह जब 1000 KB होता है तो उसको 1 मेगाबाइट MB कहते हैं इसमें अच्छी क्वॉलिटी के फोटो या mp3 गाने समा सकते है

फिर इसके बाद आता है 1000 GB यानि 1 टेराबाइट Tb यह हाईड्राइव या SSD जैसे बड़े इस्टोरेज में इस्तेमाल किया जाता है और फिर जब एक हजार टेराबाइट को मिलते है तो बनता है 1 पेटाबाइट्स pb यह एक बहुत बड़ी मात्रा को दर्शाता है यह ज्यादातर बड़े डेटा सेंटर में इस्तमाल होता है अभी जैसे जैसे दुनिया आधुनिक और एडवांस हो रहे है वैसे वैसे इनकी जरूरत भी बढ़ रहे है

यह तकनीक कैसे काम करती है?

1.02 Pbps इंटरनेट स्पीड पाने के लिए वैग्नानिको ने एक खास तरह की टेक्नालॉजी का इस्तेमाल किया है जहां आम फाइबर में एक कोर होता है तो वही इस 1.02 Pbps स्पीड के लिए 38 कोर का इस्तेमाल हुआ है जिससे एक साथ कई लेन में डेटा ट्रांसफर किया जा सकता है

1.02 Pbps इन्टरनेट स्पीड जो की दुनिया का सबसे फास्ट इंटरनेट है इसको जापान के NICT (National Institute of Information and Communications Technology) ने बनाया है और पूरी दुनिया को चौका दिया है लेकिन यह तकनीक अभी सिर्फ रिसर्च लैब तक सीमित है और यह अभी बहुत महंगी है लेकिन जैसे जैसे समय बीतेगी वैसे ही इसकी कीमत भी काम होगी और यह बड़े शहरों कॉरपोरेट हब और फिर आम घरों तक पहुंचेगी।

कोर क्या होता है

कोर का मतलब होता है वह रास्ता जिससे डेटा प्रकाश के रूप में फाइबर केबल के अंदर यात्रा करता है जब हम फाइबर ऑप्टिक केबल की बात करते है तो यह एक पतली नली जैसी होती है जिसके बीच एक सीधी लाइन होती है और यही कोर होता है जिसमे 1.02 Pbps इन्टरनेट डाटा ट्रांसफर होता है

कोर किस चीज़ का बना होता है

फाइबर ऑप्टिक का कोर आम तौर पर दो चीजों का बना होता है पहला ग्लास (Silica Glass / सिलिका कांच) का बना होता है और दूसरा प्लास्टिक (Plastic Optical Fiber – POF) का बना होता है इन दोनो में क्या फर्क होता है।

ग्लास (Silica Glass / सिलिका कांच) क्या होता है?

फाइबर ऑप्टिक कोर में जो सबसे ज्यादा उपयोग होता है वह है ग्लास सिलिका यह का बना होता है यह बहुत शुद्ध और पारदर्शी कांच होता है जिसे विज्ञानिको ने उच्च गति से डेटा ट्रांसफर करने के लिए डिजाइन किया है इस ग्लास से बने कोर की सबसे खास बात यह है की इसमें सिग्नल लाइन बहुत कम नुकसान से गुजर जाता है

यानी डेटा बिलकुल न के बराबर नुकसान होता है यह कोर वहा ज्यादा इस्तेमाल होता है जहा से हमको लंबा इंटरनेट केबल बिछाने की जरूरत होती जैसे की समुंदर के अंदर यह न सिर्फ मजबूत होती है बल्कि यह वातावरण में होने वाले बदलाओं जैसे गर्मी नामी दबाओ इनको भी घेलने में सक्षम होती है यही वजह है जब बात होती है हाई स्पीड और लॉन्ग डिस्टेंस इंटरनेट ट्रांसमिशन की तो सिलिका ग्लास को 1.02 Pbps स्पीड के लिए सबसे भरोसेमंद कोर माना जाता है

प्लास्टिक ऑप्टिकल फाइबर (Plastic Optical Fiber – POF) क्या होता है?

पलास्टिक ऑप्टिकल फाइबर यह कोर प्लास्टिक की बनी होती है न की कांच होती है यह गिलास फाइबर कोर के मुकाबले सस्ती और और काफी लचीली होती है इनका इस्तेमाल खास कर काम दूरी और घरेलू कनेक्शन में होता है POF से बनी केबल को मुड़ना और इंस्टाल करना बहुत आसान होता है

इस कोर का सबसे बड़ा नुकसान यह है की इसमें गुरजने वाले प्रकाश लाइट सिग्नल लॉस और डेटा लॉस ज्यादा होता है जिससे यह लंबी दूरी और हाई स्पीड के लिए उतना लायक नही होता है यह टीवी कनेक्शन, छोटे ऑफिस नेटवर्किंग, ऑटोमोबाइल और लाइटिंग सिस्टम जैसे हल्के कामों में उपयोग होता है

क्या भारत इसके लिए तकनीकी रूप से तैयार है?

भारत तकनीकी रूप से इस स्पीड को अपनाने की दिसा में बढ़ रहा है लेकिन अभी 1.02 Pbps स्पीड के लिए पूरी तरह तैयार नही है अभी भारत में jio एयरटेल और भी दूसरी कम्पनी जो भारत के छोटे गांव और कस्बों में 5G इंटरनेट पर काम कर रहे है तो वही भारत सरकार 6G Network पर काम कर रही है लेकिन अभी भी हर जगह 5G नेटर्वक ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है

जापान जैसे 1.02 Pbps की स्पीड के लिए हम आधुनिक फाइबर ऑप्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और उच्च गुणवत्ता वाले टार्नमिशन सिस्टम और मल्टी कोर टैक्नोलॉजी की जरूरत है हाला की भारत सरकार इन पर काम कर रही है

अगर देखा जाए तो भारत में अभी ज्यादातर फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क सिंगल-कोर या ड्यूल-कोर तकनीक पर आधारित हैं, जबकि जापान जैसी स्पीड के लिए 4-core या उससे अधिक एडवांस सिस्टम चाहिए। इसके अलावा, भारत में अधिकांश डिवाइस और नेटवर्क इक्विपमेंट अभी उस स्तर के नहीं हैं जो 1 Pbps स्पीड को सपोर्ट कर सकें। नेटवर्क ट्रैफिक मैनेजमेंट, डाटा सिक्योरिटी, और हार्डवेयर अपग्रेडेशन जैसी समस्या अभी भी है

क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर के मामले में भारत तरक्की कर रहा है, और कई ग्लोबल कंपनियों ने भारत में इन्वेस्ट करना शुरू किया है। भारत के पास टैलेंट और इंजीनियरिंग स्किल्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन रिसर्च और इनोवेशन के लिए जरूरी फंडिंग, नीति में तेजी, और इंडस्ट्री-अकैडमिक कोलैबोरेशन की आवश्यकता है

1.02 Pbps हाई-स्पीड इंटरनेट के फायदे

1.02 Pbps (Petabits per second) की स्पीड इतनी तेज़ होती है कुछ सेकंड में ही 100,000 से भी ज़्यादा HD फिल्में डाउनलोड कर सकते हैं। इससे डेटा ट्रांसफर बहुत तेज़ी से कर सकते है स्ट्रीमिंग, या साइंटिफिक रिसर्च हो कई गुना तेजी से हो सकेगा

Machine Learning और AI मॉडल्स को ट्रेन करने में भारी मात्रा में डेटा की ज़रूरत होती है। 1.02 Pbps से यह काम सेकंड्स में हो सकता है, जिससे नई टेक्नोलॉजीज और इनोवेशन तेज़ी से आएँगी

रिमोट एरिया में भी बिना किसी लैग के ऑनलाइन क्लासेज़, ऑपरेशन्स या डॉक्टर-कंसल्टेशन संभव हो पाएँगे। इससे स्वास्थ्य और शिक्षा में आसानी आएगी भविष्य में जब इंटरनेट उपयोग बढ़ेगा, तब ऐसी स्पीड ज़रूरी होगी ताकि ट्रैफिक मैनेजमेंट स्मूथ बना रहे और सिस्टम डाउन न हो

1.02 Pbps हाई-स्पीड इंटरनेट के नुकसान

इस स्तर की स्पीड को प्राप्त करने के लिए अल्ट्रा-एडवांस ऑप्टिकल फाइबर, स्पेशलाइज्ड राउटर्स, और डेटा सेंटर्स की ज़रूरत होती है, जो बहुत ही महंगे हैं। इससे देश के सभी हिस्सों में इसे लागू करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो सकता है

1.02 Pbps जैसी तेज़ डेटा स्पीड के साथ अगर नेटवर्क हैक हो जाए तो भारी मात्रा में संवेदनशील जानकारी बहुत तेज़ी से लीक हो सकती है। सुरक्षा उपायों में थोड़ी सी लापरवाही बड़े डेटा ब्रीच का कारण बन सकती है

आज की अधिकतर डिवाइस और सिस्टम्स इतने तेज़ इंटरनेट को सपोर्ट नहीं करते। इससे आम उपयोगकर्ता के लिए यह स्पीड ‘बेमतलब की लग्ज़री’ बन सकती है जब तक उनका हार्डवेयर अपग्रेड न हो इस तकनीक को बनाए रखने वाले डेटा सेंटर्स को भारी बिजली की ज़रूरत होती है, जो अगर रिन्यूएबल न हो तो पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है

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बैटरी टैक्नोलॉजी कैसे बदल रही है भारत मे इलेक्ट्रिक कारो का भविष्य?

बैटरी टैक्नोलॉजी कैसे बदल रही है भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की मांग बहुत तेज़ी से बढ़ रहे है लेकिन इसका सीधा असर बैटरी टैक्नोलॉजी पर पढ़ रहा है जैसे जैसे बैटरियां पहले से ज्यादा strong सस्ती और टिकाऊ हो रही है electric vehicle (EVc) आम लोगो के पहूंच में आ रहा है यह बदलाव सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर तक ही सीमित नहीं है यह भारत के भविष्य में काफी योगदान दे रहा है बैटरी टैक्नोलॉजी से पर्यावरण को दोषित होने की मात्रा कम किया जा सकती है आज के इस लेख में हम जानेंगे की बैटरी टैक्नोलॉजी और (EVs) से हमको क्या क्या फायदे और नुकसान है और इसके भविष्य के बारे में समझने की कोसिस करेंगे।

भारत में बैटर टेक्नॉलॉजी की वर्तमान स्थिति(Current status of battery technology in India)

बैटरी टेक्नालॉजी में कुछ वर्षो में काफी बदलाओं आया है इसकी वजह है (EVs) की तरफ लोगो की दिलचस्पी बढ़ रहे है और ऐसा इस लिए हो रहा की आज के समय में इलेट्रिक कारे बहुत ही एडवांस हो गई है बैटरी EV कि रीढ़ की हड्डी ही नही बल्कि परफॉर्मेंस कीमत और सुरछा को भी तय करती है 

पहले जहा इलेट्रिक वाहनों में लिथियम आयन बैटरी का उपयोग होता था वही अब इनकी जगह पर solid state battery और sodiyam ion battery अपनी जगह बना रही है Electric vehicle (EV) के लिए आज के समय में सबसे अच्छी बैटरी की बात करे तो बैटरी टैक्नोलॉजी के आधार पर कुछ परमुख्य बैटरिया है

जिन्हे अलग अलग क्षेत्रों में सबसे अच्छा माना जा रहा है नीचे 4 बैटरियों का जिक्र किया गया है जिनकी EV इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा जरूरत और चर्चा है जो आने वाले समय में (EV) सेक्टर को पूरी तरह बदल सकती है

1 लिथियम आयन बैटरी (Li-ion battery)

आज की तारीख में लगभग ज्यादातर गाडियां में lithium ion battery का उपयोग हो रहा है हल्की यह उच्च ऊर्जा वाली होती है तथा यह बार बार चार्ज भी की जा सकती है इनमे (high Energy Density) होती हैं जिनको एक बार चार्ज करने पर वाहन लंबा सफर तय कर सकते है

लेकिन lithium ion battery में कुछ खराबी भी है इन बैटरियों में overheting और आग लगने का खतरा रहता है इनमे लिथियम जैसे पदार्थ का उपयोग होता है जो इन बैट्री को महगा भी बनाते है साथ ही पर्यावरण को चुनौतीपूर्ण बनता है।

2 सॉलिड स्टेट बैटरी(solid-state battery)

इन बैटरों को फ्यूचर की सबसे भरोसेमंद बैटरी माना जा रहा है जहा दूसरी बैटरी में एलिट्रोलाइट का उपयोग होता है वही इस बैटरी को बनाने में सॉलिड मैटेरियल का इस्तेमाल होता है जो इसके नाम से पता चलता है यह बैटरियां ज्यादा सुरक्षित टिकाऊ और तेज़ी से चार्ज होने वाली होती है 

यह तकनीक अभी प्रोग्रेस में है और यह अभी बड़े पैमाने पर जब उपलब्ध होगी तो ऐसा माना जा रहा है की यह लीथियम आयन बैटरी की जगह ले सकती है

3 सोडियम आयन बैटरी(sodiyam ion battery)

इन बैटरियों में लिथियम की जगह सोडियम का उपयोग होता है सोडियम धरती पर काफी ज्यादा मात्रा में उपलब्ध है इस लिया यह बैटरियां सस्ती और पर्यावरण अनुकूल होती है और इनको बनाने में भी आसानी होती है आने वाले समय में बैटरी टैक्नोलॉजी के रूप में यह बैट्री उभर सकती है

लेकिन इन बैटरियों में उर्चा घनत्व थोड़ा काम होता है इसकी वजह से इनका इस्तेमाल अभी कम दूरी वाले(EVs) जैसे दो पहिए में ज्यादा होता है भारत जैसे बड़ी EVs मार्किट में यह एक किफैती और बैटरी टैक्नोलॉजी का बेहतरीन ऑप्शन बन सकता है

4 लिथियम फेरो फास्फेट बैटरी(LFP battery)

अभी के समय में tesla, TATA और चाइनीज कंपनिया अपने (EV) में लिथियम फेरो फास्फेट बैटरियों का उपयोग कर रहे है यह बैटरियां अभी बहुत ही लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इन बैटरियां में अधिक तापमान सहनशीलता होती है

और यह बाकी बैट्री के मुकबले सस्ती और टिकाऊ तेज़ चार्जिंग में बेहतर होती है भारत जैसे गरम तापमान में जहा बाकी बैटरियां जल्दी गरम हो जाती है उसमे यह बैट्री एक अच्छा समाधान बन सकती है

बैट्री निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता की शुरुवात(Battery manufacturing is the beginning of India’s self-reliance)

भारत अभी तक लिथियम आयन बैटरी का आयात चीन जापान और कोरिया जैसे देशों से करता रहा है लेकिन भारत सरकार ने नई योजना लेके आई है PLI यानी(Production Linked Incentive) और राष्ट्र निर्माण जैसे कदमों के बाद देश में बैटरी निर्माण और बैटरी टैक्नोलॉजी में बहुत सी कंपनीयों ने निवेश शुरू कर दिया है

Reliance, Tata, Ola Electric, और Amara Raja जैसी कंपनियां अब भारत में ही बैटरी टैक्नोलॉजी की दिशा में काम कर रही है आने वाले कुछ सालो में भारत बैटरी और EV के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है

भारत में बैटरी निर्माण और बैटरी टैक्नोलॉजी की दिशा में बीते कुछ वर्षो में काफी बदलाओं देखने को मिला है वह सिर्फ तकनीक विकास ही नही बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता की ढोस और मजबोत झलक दिख रही है वर्षो तक देश विदेशो पर निर्भर रहा फिर चाहे ओह मोबाइल हो, इनवर्टर और अब इलेक्ट्रिक वाहन EV

लेकिन जैसे जैसे भारत में इलेट्रिक वाहनों की मांग तेज हो रही है ठीक इसी तरह बैटरी निर्माण की समस्या भी गंभीर होती नजर आ रही थी लेकिन सरकार ने इसको समझा और (PLI, FAME-II स्कीम, स्वच्छ ऊर्जा मिशन) जैसी योजना लाई साथ ही इन बैटरी निर्माण कंपनियों को सरकार की तरफ से अधिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है

सरकार की इस योजना के आने के बाद देश की प्रमुख कंपनियों में होड़ से लग गई है हर कोई बैटरी निर्माण के लिए प्लांट लगा रही है यह कंपनिया सिर्फ लिथियम आयन बैटरी ही नही बल्कि सॉलिड स्टेट और अन्य अगली जेनरेशन की बैटरी पर भी काम कर रही है 

अब भारत बदल चुका है भारत पहले manufacturing तक ही सीमित था लेकिन अब भारत रीसाइक्लिंग और कच्चे माल कि सोर्सिंग और अन्य स्थानीय चीजों पर काम कर रहा है देश में अब अलग अलग जगहों पर खनिज की पहचान और खुदाई भी तेज हो गई है 
बैटरी टैक्नोलॉजी सिर्फ EV तक ही सीमित नहीं है बैटरी सोलर स्टोरेज, डेटा सेंटर, स्मार्ट ग्रेडर्स, डिफेन्स सिस्टम, तक फैल चुकी है भारत 2030 तक बैटरी टैक्नोलॉजी सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भर बन जायेगा

प्रदूषण और उर्जा बचत तथा बैटरी रीसाइक्लिंग का असर(pollution and the impact of energy savings and battery recycling)

हम ने बैटरी टेक्नालॉजी के छेत्र में अपनी पकड़ बना ली है भारत अब (EVs) में भी खुद को मज़बूत बना रहा है लेकिन बैटरी टैक्नोलॉजी के अलावा जिस सेक्टर में हमको अभी ध्यान देने की सख्त जरूरत है और ओह है प्रदूषण और बैटरी रीसाइक्लिंग क्योंकि जैसे जैसे हम बैटरी निर्माण और EV निर्माण में खुद को खड़ा कर रहे है उस्सी तरह इन निर्माण से प्रदूषण भी बड़ेगा

1 प्रदूषण का असर(effect of pollution)

हम जो बैटरी इस्तेमाल करके फेंक देते हैं जो बैटरियां पुरानी हो जाती हैं उसकी वजह से पर्यावरण प्रदूषण के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो रही हैं बैटरी में इस्तेमाल होने वाले केमिकल जैसे लिथियम कोबाल्ट नेकल और मैंगनीज यह धरती में रीस कर मिट्टी और पानी को जहरीला बना सकते है 

पुरानी बैटरियों का फेका जाना प्रदूषण को सीधे तौर पर बड़वा देना है जो जल वायु और भू-प्रदूषण तीनों के लिए खतरनाक है इसका एक ही समाधान है की बैटरियों की रिसाइक्लिंग की जय इससे न सिर्फ जहरीले कचरे से बचाओ होता है बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व को दुबारा उपयोग किया जा सकता है

2 ऊर्चा बचत बैटरी निर्माण की चुनौतियां और समाधान( Challenges and solutions for energy saving battery manufacturing)

बैटरी निर्माण में ऊर्जा की बहुत ज्यादा खपत होती है लिथियम नेकल कोबाल्ट और अन्य धातु जो बैटरी बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते है उनकी मीनिंग और प्रोसिंग भी शामिल होती है इन धातुओं को बाहर निकालने के लिए भरी मशीनों और बिजली का उपयोग किया जाता है जिसकी वजह से कार्बन फुटप्रिंट और उर्जा खर्च बहुत बढ़ जाता है 

हालाकि बैटरी उत्पादन में जितना खर्च आता है उसका बड़ा हिस्सा कच्चे मॉल और मैनिंग में जाता है इन खर्च को कम करने का एक ही समाधान है बैट्री रीसाइक्लिंग नई लिथियम आयन बैटरी बनने में जितनी ऊर्जा खर्च होती है उसकी तुलना में बैटरी रिसाइलिंग से अवसायक ऊर्जा की खपत 75% काम हो जाती है

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ताजा शोध की मुताबिक बैटरी निर्माण में होने वाले खर्च और उर्जा की बचत होती है बल्कि इससे ग्रेन्हाउस गैसों में भी भारी कमी आती है बैटरी रीसाइक्लिंग से ऊर्जा के साथ साथ इसमें जल का उपयोग कम होता है जल में भी 70% तक बचत हो सकती है

3 रीसाइक्लिंग क्यों है ज़रूरी(Why is recycling important)

भारत तेज़ी से इलेक्ट्रिक, सौर ऊर्जा, और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी टैक्नोलॉजी की ओर बढ़ रहा है जिससे लिथियम जैसे तत्व का उपयोग बढ़ता है लेकिन 95% से अधिक बैटरियां e west और गैर अपचारिक रूप से निपटाई जाति है जिससे जहरीले रसायन प्रायवार्ड और हेल्थ को दूषित करते है इन सब समस्याओं से निपटने का एक ही हाल है रिसाइक्लिंग यह एक अच्छा और टिकाऊ रास्ता है 

कचरे में जाने वाले बैटरी मैटेरियल को सुरचित रूप से बाहर निकल और अच्छे से प्रोसेस कर सकते है बैटरी रीसाइक्लिंग से कीमती धातुओं को दुबारा से नई बैटरी बनाने में उपयोग कर सकते है जिससे नई बैटरी की कीमत में गिरावट भी आ सकती है और इससे न सिर्फ पर्यावार्ड को दोषित होने से बचा सकते है बल्कि इससे देश में रोजगार भी बढ़ सकते है 

भारत सरकार ने Battery Manegment Rules 2022 लागू किया है जो रीसाइक्लिंग को मजबूती देना का काम कर रही है लेकिन अभी भी इसमें बहुत सा सुधार करना बाकी है

आपको यह लेख कैसा लगा है comment में जरूर बताएं

आपको इसमें कोई कमी नज़र आए तो हम जरूर सजा करे इस लेख में हम बैटरी टैक्नोलॉजी भारत की वर्तमान स्थिति और रीसाइक्लिंग के बारे में हमने चर्चा की है ,

बैटरी का रहस्य: कैसे बनती है, कैसे काम करती है और क्यों है ये भविष्य में भारत की सबसे ज़रूरी तकनीक?”2025

बैटरी हमारी जिंदगी को आसान बनाने में बहुत मदद करती है इसकी मदद से हम अपने मोबाइल फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं इसकी बैटरी की मदद से हम बिजली न होने पर भी इन चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं

बैटरी का जहां नाम आता है वहां पर हमारे दिमाग में क्या ख्याल आता है कि बैटरी बनती कैसी है और बैटरी कम कैसे करती है इसी का जवाब हम इस लेख में देंगे बैटरी बनाने से हमारे पर्यावरण पर क्या असर पड़ रहा है और इससे हमको क्या क्या-क्या फायदा मिलता है

बैट्री कैसे बनती है (how is the battery made)

बैट्री बनाने के लिए इसमें कई रासानिक धातुओं और सामग्री की जरूरत पड़ती है इसमें दो एलेट्रोड होते है एक कैनोड (ऋणात्मक) और कैथोड (धनात्मक) इन सबको मिला कर एक रसनिक प्रक्रिया होती है और हमको एक ऊर्जा स्रोत प्राप्त होता है

एलेट्रोलाइट (Electolight)

इलेक्ट्रोलाइट की मदद से बैटरी कैसे बनती है, यह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।

बैटरी बनाने की प्रक्रिया में जो दूसरी चीज इस्तेमाल होती है वह इलेक्ट्रोलाइट या एक रासायनिक पदार्थ होता है इलेक्ट्रोलाइट की मदद से हम बाकी रसायनों को अलग करते हैं जिनसे विद्युत प्रवाह बहाने में आसानी होती है। 

इन रसायनों के माध्यम से हम यह समझ सकते हैं कि बैटरी कैसे बनती है।

इसलिए, बैटरी कैसे बनती है, यह जानना बहुत जरूरी है।

बैट्री में उपयोग होने वाले रसायन(chemicals used in batteries)

वोल्टा की बैटरी से लेकर आज की बैटरी कैसे बनती है, यह एक यात्रा है।

बैटरी कैसे बनती है, यह जानने के लिए हमें इसके इतिहास पर ध्यान देना होगा।

बैटरी बनाने की प्रक्रिया में आमतौर पर चार रासायनिक पदार्थक इस्तेमाल किया जाता है

एक बैट्री बनाने में इन 4 रासायनिक पदार्थ की आवासक्त होती है और जो दूसरी बैट्री होती है जैसे की लीथियम बैट्री उसमे लीथियम कोबाल्ट आयन होता है इससे प्रकार हर बैट्री में कुछ न कुछ फर्क होता है हम ने जो बताया ओह एक एसिड बैट्री है।

पहली बैट्री कैसे बनाई गई थी(How the first battery was made)

पहली बैट्री जिसे वोल्टा पाईल कहा जाता है इसको इतालवी भौतिक वैगानिक एलसेंड्रो वोल्टा ने बनाया था उन्होंने पहले बैटरी बनाने के लिए जस्ता तांबा और खारे पानी में डूबा हुआ एक कपड़ा का इस्तेमाल किया। फिर उन्होंने तांबे और जस्ता की प्लेटों को एक जार में रखा इन प्लेटो को अलग रखने के लिए उन्होंने खारे पानी में भीगा हुआ कपड़ा रखा जिससे यह अलग रहे यह काम करने के बाद अब जार ने एक विद्युत परवाह उत्पन्न होने लगी थी

वोल्टा ने इसमें बिजली के झटके महसूस किया हाला की अभी इस बैट्री में बहुत से बदलाओं बाकी थे। The first battery के बारे और जाना चाहते है तो इस लेख को पड़ेपहली बैट्री जिसे वोल्टा पाईल कहा जाता है इसको इतालवी भौतिक वैगानिक एलसेंड्रो वोल्टा ने बनाया था उन्होंने पहले बैटरी बनाने के लिए जस्ता तांबा और खारे पानी में डूबा हुआ एक कपड़ा का इस्तेमाल किया। 

फिर उन्होंने तांबे और जस्ता की प्लेटों को एक जार में रखा इन प्लेटो को अलग रखने के लिए उन्होंने खारे पानी में भीगा हुआ कपड़ा रखा जिससे यह अलग रहे

काम करने के बाद अब जार ने एक विद्युत परवाह उत्पन्न होने लगी थीवोल्टा ने इसमें बिजली के झटके महसूस किया हाला की अभी इस बैट्री में बहुत से बदलाओं बाकी थे।Who made the battery? The journey from the first battery to the next इस लेख में बैट्री पहली बैट्री की पूरी जानकारी दी गई है

बैट्री क्या है अगर इसको आसान भाषा में कहे तो यह एक उपकरण है जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने का काम करती है इसमें कई प्रकार के रसायन होते है जो इस प्रक्रिया को पूरा करने में उपयोग होते है आज के समय में बाजार में बहुत से आधुनिक बैट्री आ गई है। जैसे कि lithium ion battery, lid acid बैट्री लेकिन सबका काम करने का तरीका एक जैसा होता है

बैट्री कैसे काम करती है (how does the battery work)

बैट्री क्या है अगर इसको आसान भाषा में कहे तो यह एक उपकरण है जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने का काम करती है इसमें कई प्रकार के रसायन होते है जो इस प्रक्रिया को पूरा करने में उपयोग होते है आज के समय में बाजार में बहुत से आधुनिक बैट्री आ गई है। जैसे कि lithium ion battery, lid acid बैट्री लेकिन सबका काम करने का तरीका एक जैसा होता है बैट्री कैसे काम करती है इसको हम दो भागो में समझेंगे

  • Charging process
  • Diccharging process

1 बैट्री चार्जिग प्रक्रिया (battery charging process)

बैट्री चार्ज करने के लिए सबसे पहले हमको जिस कि जरूरत होती है है चार्जर इसकी मदद से हम AC ऊर्जा को DC उर्जा में बदल कर battery चार्ज करते है

बैट्री में दो प्वाइंट होते है एक पॉजिटिव और एक नेगेटिव बैट्री जब हम चार्ज करते है तो विद्युत ऊर्जा पॉजिटिव प्वाइंट से अंदर जाती है और नेगेटिव प्वाइंट से बाहर आती है और जब यह प्रक्रिया चल रहे होती है तो बैट्री अपने अंदर ऊर्जा इकट्ठा कर लेती हैं

2 बैट्री डिस्चार्ज प्रक्रिया (Dicchargeing process)

आने वाले समय में बैटरी कैसे बनती है, यह और भी विकसित होगा।

बैटरी कैसे बनती है, इसके विकास की प्रक्रिया में कई नए तरीके आएंगे।

बैटरी कैसे बनती है, इसके बारे में जानकारी रखना भी आवश्यक है।

जब हम किसी डिवाइस में बैटरी का उपयोग करते हैं, तब बैटरी में स्टोर की गई रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदल जाती है। इस प्रक्रिया को बैटरी डिस्चार्जिंग कहा जाता है। इसमें इलेक्ट्रॉन्स बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से डिवाइस की ओर बहते हैं और डिवाइस को जरूरी पावर देते हैं। जैसे-जैसे बैटरी डिस्चार्ज होती है, उसमें मौजूद ऊर्जा धीरे-धीरे कम हो जाती है। अगर डिस्चार्ज पूरी हो जाए तो बैटरी को फिर से चार्ज करना पड़ता है ताकि वह दोबारा काम कर सके। डिस्चार्जिंग की यह प्रक्रिया हर बैटरी के लिए सामान्य होती है, चाहे वह मोबाइल की हो, लैपटॉप की या फिर इन्वर्टर की।

बैट्री का भविष्य और तकनीक (The future and technology of batteries)

बैट्री आज के समय में सिर्फ मोबाइल और लैपटॉप में उपयोग होनी वाली बैट्री नहीं रह गई है आज हम इसका उपयोग electric car, solar energy बहुत जहा उपयोग में ले रहे है और अभी बैट्री की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गाई है

यदि हम समझें कि बैटरी कैसे बनती है, तो हम इसके उपयोग को और बेहतर बना सकते हैं।

बैटरी कैसे बनती है और इसके उपयोग के लाभ भी महत्वपूर्ण हैं।

बैटरी कैसे बनती है, यह जानने का एक और तरीका है इसके फायदे समझना।

इस लेख में हमने देखा कि बैटरी कैसे बनती है और इसके विभिन्न पहलुओं को समझा।

बैटरी कैसे बनती है, इसके बारे में जानकारी होना आपको अधिक समझ प्रदान करेगा।

आधुनिक बैटरी की तकनीक में बैटरी कैसे बनती है, यह भी एक महत्वपूर्ण विषय है।

बैट्री का भविष्य (the future off the battery)

बैटरी कैसे बनती है, यह समझने से हमें उसके फायदे भी समझ में आते हैं।

आने वाले समय में बैट्री टेक्नोलॉजी में कई सुधार देखने को मिल सकते हैं। आजकल हर दिन कोई न कोई नई बैट्री बाजार में आ रही है, लेकिन अभी भी ज़रूरत है ऐसी बैटरियों की जो तेज़ी से चार्ज हों, ज़्यादा समय तक चलें, साइज में छोटी और कीमत में किफायती हों। ऐसे बदलाव ही बैट्री का असली फ्यूचर कहलाएंगे, और यही दिशा हमें नई ऊर्जा तकनीकों की ओर ले जाएगी।

बैट्री की तकनीक (battery technology)

आज के समय में जिस तेज़ी से दुनिया टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है, उसी के साथ-साथ बैटरी टेक्नोलॉजी में भी बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कुछ वर्षों पहले तक जहाँ बैटरियों का उपयोग सीमित था, वहीं अब मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक बाइक, इनवर्टर और सोलर सिस्टम जैसे उपकरणों में बैटरियों की अहम भूमिका हो गई है।

इसलिए, बैटरी कैसे बनती है, इसके बारे में जानना हर एक व्यक्ति के लिए जरूरी है।

पहले के समय में लेड-एसिड बैटरी (Lead Acid Battery) का ही ज़्यादा उपयोग होता था, लेकिन अब टेक्नोलॉजी के विकास के साथ-साथ लिथियम-आयन बैटरी (Lithium-ion Battery) और लाइफपो4 बैटरी (LiFePO4 Battery) जैसी आधुनिक बैटरियाँ बाज़ार में आ गई हैं। ये बैटरियाँ न केवल हल्की होती हैं, बल्कि इनकी चार्जिंग स्पीड भी तेज़ होती है और इनका जीवनकाल भी ज्यादा होता है।

इन बैटरियों के कुछ प्रमुख फायदे:

  • वजन में हल्की होती हैं
  • जल्दी चार्ज होती हैं
  • अधिक समय तक चलती हैं
  • रखरखाव की जरूरत कम होती है

पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित होती हैंआज के समय में इन आधुनिक बैटरियों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सोलर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में। आने वाले समय में बैटरी टेक्नोलॉजी में और भी इनोवेशन देखने को मिल सकते हैं जैसे कि सॉलिड स्टेट बैटरी, जो और भी सुरक्षित और पावरफुल होंगी

The Mosquito Drone China made the smallest mosquito drone in 2025

The mosquito drone अगर आपकी जासूसी एक मच्छर करने लगे तो क्या होगा जी हां china ने दुनिया का सबसे छोटा the Mosquito dorne बनाया है जो दिखने में बिल्कुल मच्छर की तरह है इस लेख में हम जानेंगे की इसमें क्या फायदे और नुकसान है इससे हम किस तरह फायदा ले सकते है इसमें कितने Specialty के बारे में बात करेंगे 

Features of Mosquito Drone(खासियत मच्छर ड्रोन की)

The mosquito drone: A Revolutionary Technology in Modern Warfare

दुनिया के सबसे smallest The mosquito Drone इस ड्रोन में आपको बहुत से featuers है इस ड्रोन की साइज 1-2 सिंट्टीमीटर इसकी लंबाई है यह ब्लैक मच्छर की skin के कॉलर का बनाया गया है इसका वजन 0.3 ग्रीम है इसमें दो पंख भी लगाए गए है जो इसको उड़ने में मदद करता है और यह मच्छर की जैसे आवाज भी निकल सकता है इसमें 3 पैर और maicro camra senser भी लगा हुआ है 

इसको नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) द्वारा बनाया गया है इसको सबसे पहले चीन के सैन्य चैनल CCTV 7 par दिखाया गया इस ड्रोन कीखबर दुनिया भर में आग की तरह फैल गई है हर कोई चाइना की इस कमियाब्बी पर हैरान है जो पहले न मुमकिन लगता था चाइना ने उसको मुमकिन बना दिया यह टेक्नोलॉजी की दुनिया में नया कदम साबित हो सकता है 

Advantages of China The Mosquito Drone(मच्छर ड्रोन के फायदे)

The mosquito drone को जो सबसे खास बनता है ओह इसका आकार इतने छोटे आकार का ड्रोन होने से हमको बहुत से फायदे मिलते है यह ड्रोन बिना अपनी मौजदगी बताए दुश्मन की निगरानी कर सकता है इसकी आवाज और इसका कॉलर से इसको कोई देख नहीं सकता साथ ही इसमें एक बेहतरीन किस्म का कैमरा और gps tracker भी मौजूद है The smallest drone

इस छोटे ड्रोन का सबसे अच्छा फायदा यह है की जहा बड़े आकार के ड्रोन नहीं जा पाते थे वहा यह ड्रोन वहा भी चुपके से जा कर अपना काम पूरा कर सकता है

Disadvantages of China The Mosquito Drone

जहा इस मच्छर ड्रोन के बहुत से फायदे है the mosquito drone के कुछ नुकसान भी है इस ड्जो सबसे पहली कमी है ओह है इसकी छोटी इसमें लगी बैट्री की की कैपेक्टी ज्यादा न होने के कारण यह ज्यादा समय कार्य करने में सक्षम नही है 

अगर यह drone गलत हाथ में पढ़ जाता है तो इसको नुकसान हो सकता है इसमें सबसे बड़े खतरा यह है  इससे किसी की भी privecy sefe नही  होगी इसकी मदद से दुश्मन हमरे हर छूटी छूटी हरकतों पर बारीकी से नजर रख सकता है जो अच्छी बात नही है 

इसके छोटे आकार की वजह से यह बारिश के मौसम में उड़ नही सकता साथ ही यह तेज़ हवा में भी सफर नही कर सकता तेज़ हवा और बारिश में यह अपनी दिशा से भटक सकता है 

China mosquito drone use 

The mosquito drone यह छोटा मच्छर ड्रोन सैन्य सुरक्षा के अलावा और कही जगह उपयोग किया जा सकता है इसकी मदद से हम यह mosquito drone हमारी संकेत भेजने में बहुत काम आ सकता है इसकी android Mobail से चलाया जा सकता है 

टेक्नोलॉजी  (टेक्नोलॉजी)
The mosquito drone अगर technology की बात करे तो इससे कुछ नया नहीं है बाकी ड्रोन की तरह इसमें भी camra battery, fan, aur gps tracker हैं लेकिन इस ड्रोन और दूसरे ड्रोन में के मुकाबले इसको जो खास बनता है ओह है इसका आकार आज पहले इस तरह smallast drone नही देखा गया है इतने छोटे आकार की ड्रोन में इतनी सारे feacher का होना बहुत बड़ी बात है

आप इस ड्रोन से यह अंदाजा लगा सकते है की चाइना technology मे कितना आगे बढ़ चुका है चीन आज के समय में बहुत ज्यादा विकसित हो चुका है जो इंसान के लिए अहसानी पैदा करता है

बैट्रीWho made the battery? The journey from the first battery to the next battery

http://Mosquito Drone:

What is Lithium ion battery Lithium ion battery Price ? All details

आज के समय में मार्किट में बहुत प्रकार की बैटरी है उन्ही में से एक है lithium ion batteries अब लोगो का यह सवाल होता है कि lithium ion battery क्या है lithium ion battery price क्या है तो आज के लेख में हम जानेंगे की इसका फायदे और नुकसान क्या है इसकी कीमत यह कहा इस्तेमाल होती है आदि।

Lithium ion batteries क्या है?

Lithium ion battery यह एक तरह से rechargeable बैटरी है इनको हम तरह से उपयोग में लेते है हर battery कि तरह इसमें भी दो इलेक्ट्रोड होती है एक possitive और एक nigetive जिसकी हम हिंदी में धनात्मक और ऋणात्मक भी कहते है

Lithium ion battery में लिथियम आयन होता है जो इसको rechargble बनाता है इसमें एनोड और कैनोड केमिकल होते है। इलेक्ट्रोलाइट जो एक दूसरे को अलग करता है जब बैट्री का चार्ज खतम होता है तो कैनोड ऐनोड की तरफ जाता है और जब बैट्री वापस चार्ज होती हो तो यह उसको अपनी तरफ खींचता है

ऐनोड ( Anode) कैथोड (cathode) किसे कहते है?

  • Anode ऐनोड यह लिथियम कोबल्ट एक्साइड या लिथियम मैगनीज एक्साइड से बना होता है।
  • कैथोड (cathode) यह कार्बन ग्रेफाइड से बना होता है

Where is Lithium ion battery used

Lithium ion battery कई जगह उपयोग होती है जैसे की कैमरा मोबाइल फोन टैबलेट लैपटॉप और ग्रीन एनर्जी में इसका बहुत ज्यादा उपयोग होता है यह एक long Life battery होती है साथ ही यह वजन में दूसरे बैट्री के मुकाबले काफी हल्की होती है

Advantages and disadvantages of lithium ion battery

lithium ion battery में बहुत फायदे और नुकसान है जो सबको पता होना चाइए क्योंकि lithium ion battery हर कोई उपयोग करता है।

  • Advantege (फायदे) lithium ion battery मे उच्च ऊर्जा घनत्व हल्का वजन होता है साथ ही जल्दी चार्जिंग और कम रख रखाओ की जरूरत होती है।
  • Disadvantages ( नुकसान) इस बैट्री में जो सबसे बड़ी कमी है ओह है यह जल्दी गरम हो जाती है साथ ही इसको बनाने में बहुत ज्यादा लागत लगती है और इसमें पर्यावरण की नुकसान का भी चिंता है इस बैट्री में over hitting के चलते काफी खतरा बना रहता है

What is the price of Lithium ion battery 24v in India

अगर इसकी कीमत की बात की जाए तो lithium ion battery की जो कीमत है ओह उसके वोल्टेज और किस कंपनी की बैटरी है इस पर निर्भर करता है अगर सिर्फ 24V lithium ion battery की बात करे तो यह आप को चार हजार से लेकर 44000 तक मिल जाती है और 12V lithium ion battery 24V battery के मुकाबले कम आते है

बैट्री लेने से पहले आप ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्किट में इसकी कीमत और इसकी जानकारी ले सकते है या फिर आप सीधा अपने करीब के डीलर से भी ले सकते है

भारत में लिथियम आयन क्रांति

भारत में लिथियम आयन बैटरी की मांग काफी तेजी से बढ़ रहे गई इसको एक क्रांति की तथा भी देख सकते है इसकी ज्यादा मांग इलेक्ट्रिक वहां सौर ऊर्जा मे है

भारत सरकार ने भी इसमें पहले की है ओह भी इसने सब्सीडी लोन दे रहे है तथा लिथियम आयन बैटरी को घरेलू उपयोग में लेने के लिए और बैट्री निर्माता को निशुल्क सुविधाएं भी परदान कर रहे है

2030 तक भारत में lithium ion battery की मांग कितनी है

भारत सरकार 2030 तक 30 gwh की पूर्ति करने की सोच में है और इनकी मांग elt वाहन में 370% और 800% से कार में पूरा करने की उम्मीद है

भारत में भारत में electric vehicle की और घरलू उपकरण में उपयोग होने वाली lithium ion battery की मांग को पूरा करने किया 3030 तक 10 अरब डालर की जरूरत हैThe first battery, history off battery timeline

और अगर आप एक निवासक है जो आपके लिए यह एक बेहतर मौका हो सकता है बैट्री कंपनी में निवासे करने का जिस हिसाब से बैट्री की मांग भारत में बढ़ रहे है उसको देखते हुए इसमें अच्छा फायदा मिल सकता है।

Who made the battery? The journey from the first battery to the next battery

Battery आज के आधुनिक जीवन में बहुत जरूरी हो गई बैट्री के मदद से हम अपने रोज मर्रा के कामों को आसान बनाते है आज का लेख इसी बारे में है the first battery हम सब लोग रोज बैट्री ka उपयोग करते और हमारे मन में यह खयाल जरूर आता होगा पहली बैट्री किसने बनाई। History off battery timeline के बारे में बहुत ही details में बताया गया है

The first battery

1930 में इराक के शहर बगदाद में विल्हेम कोनिग नाम के एक विज्ञानिक कुछ Research कर रहे थे। वहा के एक बाघबारे में 2000 साल पूराना कुछ ऐसा मिला जो देखने में बिलकुल बैट्री की तरह दिख रहा था। यह एक मिट्टी का जार था जिसकी लंबाई लगभग 13 सेमी और व्यास 4 सेमी था यह एक तांबे का सिलेंडर था जिसके अंदर लोहे की रोड थी और उसके अंदर कुछ अज्ञात बदार्थ थे जो इलेक्ट्रोकेमिकल हों सकते है और यही से शुरू होती है The first battery, history off battery timeline

history off battery timeline (1800)

The first battery की शुरुवात 1800 शताब्दी में हुई इटली के मशहूर वैज्ञानिक एलेसेंड्रॉ बोल्टा बिजली के साथ प्रयोग करना शुरू किया सन 1800 में इन्होंने पहली बैट्री बनाई जिसे वोल्टाइक पाइल कहा जाता है The first battery जोकि तांबे और जस्ता की प्लेटो से बनाई गई थी जो कार्बोनेट पानी में डूबी हुई थे

वोल्ट पाईल बैट्री की कमियां

वोल्ट पाईल कमियां इसमें सबसे पहली जो कमी थी की यह जल्दी इसका चार्जिंग समय ज्यादा नही था यह ज्यादा से ज्यादा एक घंटा चलती थी।

इलेक्ट्रोलाइन लीक होना इसमें जो दूसरी कमी थी की इसका इलेक्ट्रोलाइन लीक होना और इसका वजन भी बहुत ज्यादा था इसको एक जगह से दूसरी जगह लें जाना बहुत ही चुनौती वाला काम था

Short circuit वोल्टा की इस बैट्री में तिसरी जो कमी थे की यह कैमिकल लीक होने की वजह से इसमें शॉर्ट सर्किट होता था जो बैट्री की दूसरे शेल को भी नुकसान पहुंचाता था

the Second battery

जोन फ्रेडरिक डेनियल नमक रसायन विज्ञान के प्रोफिसर ने वोल्टा पाईल बैट्री की समस्या को सुधार करके 1836 में दूसरी बैट्री बनाई जिसका नाम पड़ा डेनियल सेल पड़ा।शुरुआती दिनों में यह बैटरी बिजली का मुख्य स्रोत बन गई थी यह वोल्टा बैट्री से बहुत बेहतर थी यह ज्यादा लंबे सयम तक करेंट देती थी यह पहले से ज्यादा Safe थी इसका ऑपरेटिंग वोल्टेज 1.1 का था जो आज की आधुनिक बैट्री है सब इसी आधार पर है।

How many types battery ? बैट्री कितने प्रकार की होती है ?

वैसे तो battery too types की होती है जो हम उपयोग करते है

प्राइमरी बैट्री not rechargble यह ओह बैट्री होती है जिनका इस्तेमाल बस एक बार ही किया जा सकता है एक बार इनका चार्ज खतम हो जाए तो यह बेकार हो जाते है इनमे भी दो प्रकार होते है।

1 अल्कलाइन बैट्री यह बैट्री घरेलू उपयोग के लिए होती है जैसे की बच्चो का खिलौना tv का रिमोट आदि।

2 जिंक कार्बन बैट्री यह बैटरी कम सक्ति वाले समानो में उपयोग में ली जाती है जैसे की इमरजेंसी लाइट आदि।

सेकेंडरी बैट्री यह ओह बैट्री होती है जिनको कई बार रिचार्ज करके इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे की

लेथियाम आयन बैट्री नेकल कैडमियम बैट्री लीड एसिड बैट्री नके आयु भी थोड़ा लंबी होती है।

लेथियम आयन बैट्री यह बैट्री मोबाइल लैपटॉप और अन्य उपकरणों में इस्तेमाल होती है

नेकल कैडमियम बैट्री यह बैट्री पवार वाले समानों में इस्तेमाल की जाती है। जैसे की घर कि invarter बैट्री में यह उपयोग की जाती है। लीड एसिड बैट्री यह बैट्री छोटे और बड़े वाहनों में इस्तमाल में ली जाती हैhttp://Battery

The future off battery

The first battery से लेकर आज की आधुनिक बैट्री की अगर बात की जाए तो जो इसमें अभी विकास हुआ हो सिर्फ 50% प्रतिशत है अभी future off battery को दिखा जाए तो आपने दिख रहे है सोलर सिस्टम आ गया है electric car भी आ गई है ओह दिन दूर नही है जब बिजली का मेन काम बैट्री से ही होगा अगर आप सोलर पैनल के बारे में जाना चाहते है तो हमारी इस पोस्ट को पढ़े

Best home invarter कौन सा है कम price मे Best quality ?

आज के समय में लगभग हर घर में invarter का इस्तेमाल किया जाता है। और हर किसी को जरूरत भी है तो आज हम बात करेंगे। Best home invarter कौन सा है। वैसे तो मार्किट में बहुत सी compeny है जो invarter बनाती है लेकिन आज हम सिर्फ 3 कंपनी के बारे में बात करेंगे जो काम price में best quality invarter देती है।

जो की india की top 2 compeny मानी जाती है आज हम जानेंगे इनकी charging power quality और कीमत के बारे में। जो है Luminous, Microtek

1 Luminous

सबसे पहले हम Luminous की बारे में जानेंने की कोशिश करेंगे बाजार में जो अभी letest model invarter है वो है luminous zilio+1100 है इसमें आपको बहुत से नए नए featuers मिल जायेंगे जो इसको बनाते है। सबसे खास इसके Kay featuers और specifications की बात करे तो आपको इसमें 32 Bit DSP Prosessar, LCD display दिखने को मिलता है साथ ही इसमें backup time, charging time, fault indicaters भी लगे हुए है

Luminous zilio+1100 में सबसे अच्छी बात यह है की इसमे MCB protection भी दिया गया है जो हमारे घर और ऑफिस के लिए बहुत अच्छा माना जा सकता है इसे बड़ी अनहोनी होने से बचा जा सकता है।अगर इसकी क्षमता की बात करे तो इसमें हमे मिलता है 900 VA/12V जो की हमारी एक 12V की battery के लिए बहुत अच्छा है और यह घर और ऑफिस में लगाने में भी बहुत सरल है इसके साथ ही 36 Manth worrnty भी है अगर इसके price के बारे में बात करे तो इसकी online price 6000 se 8500 तक है यह एक कम price मे best quality invarter माना जा सकता है

2 Microtek

Microtek compeny india की मानी जानी कंपनी है इसके सारे product काफी भरोसेमंद होते है। हमारी लिस्ट में जो दूसरे नंबर पर है ओ है Microtek inverter हैं।

1 Specifications

अगर इसकी विशेषताओ की बात की जाए तो आपको इसमें LED Display दिखने को मिलता है। यह pure sine wave inverter है साथ ही इसके LED Display से आप charging time और minutes को भी देख सकते है यह एक 9.8 Kg inverter है साथ ही इसमें power bitten भी मिलती है

2 Backup time and capicity

माइक्रोटेक इस इनवर्टर के बैकअप टाइमिंग और कैपसिटी तो इसमें आपको 8 घंटे का बैकअप टाइमिंग दिखने को मिलता है जो एक best quality invarter के लिए बहुत अच्छा है इस inverter se आप 12V battery को आसानी से चार्ज कर सकते है और इसकी capicity को देखा जाए तो आप इससे 3 fan 2 cfl 1 tv का उपयोग कर सकते है जो की home और office के लिए काफी माना जा सकता है

3 price And worrnty

प्रिंस और वारंटी के अगर बात करें तो माइक्रोटेक इनवर्टर जो कि करीब 7000 रुपए का ऑनलाइन मार्केट में आपको मिल जाएगा। माइक्रोटेक के इस इनवर्टर पर आपको 3 साल की वारंटी मिल जाएगी जोकि बहुत अच्छी बात है l

हमने आपको ल्यूमिनस इनवर्टर और microtek inverter के बारे में सब कुछ बता दिया है अब आप यह फैसला कर पायेंगे आपको किस compeny का inverter लेना चाइए

tip

आप जिस भी compeny का इनवर्टर ले कोशिश करे की उसी compeny की बैट्री Invarter battry भी ले इससे आपके charging inverter काफी फर्क पड़ता हैhttp://Luminous

150 Ah power invarter battery, best price 2025 important info

150 Ah Inverter battery लेने से पहले 4 चीज़े जरूर जान लें के टाइम पर हमारी हमारी लाइफ को जो आसान बनाती है वह है बैटरी टीवी का रिमोट हो बच्चों का खिलौना हो कार हर जगह बैटरी इस्तेमाल होती है लेकिन आज हम जिस बैटरी के बारे में बात करने जा रहे हैं वह है घर की इनवर्टर बैट्री वैसे तो मार्केट में बहुत सी कंपनियों की बैटरी अवेलेबल है लेकिन हम लेकिन हम आपको बताएंगे कि किस कंपनी की बैटरी सबसे अच्छी होती है और कम रेट में ज्यादा चलने वाली बैटरी कौन सी है

आज हम ऐसे पांच कंपनियों के बारे में बात करेंगे जो इंडिया के टॉप फाइव कंपनियां है और हम आपको बताएंगे कि किस कंपनी की बैटरी कितनी वारंटी देती है कितना हॉर्स पावर होता है 

150 Ah power inverter battery

अगर आप घर या office के लिए inverter battery लेने की सोच रहे है तो यह काफी अच्छा होगा 150 Ah battery से हम अपने घर में 2 या तीन पंखा और कम से कम 5 cfl बल्ब जला सकते है एक छूटी फैमली के लिए इतना काफी है मार्किट इससे ज्यादा भी Ah power inverter battery हैं जैसे की 150 Ah 180 Ah 220 Ah लेकिन एक छोटे परिवार या office ke Liye 150 Ah power inverter battery काफी है।

 1 battery and worrnty

Battery लेते समय हमको जो सबसे पहले देखना है है वह है worrnty हमको वारंटी से बहुत फायदा मिलता है हमको ऐसे कम्पनी की बैटरी लेनी है जिसकी वारंटी ज्यादा हो  वैसे तो वारंटी हर कंपनी अपनी अलग-अलग देता है कोई  कोई 36 माह देती है 68 माह देती है तो हमको यह देखना है जिसका सबसे ज्यादा मंत्र वारंटी है हमको वही बैटरी लेनी है ज्यादा वारंटी टाइम होने से सबसे अच्छा फायदा यह मिलता है कि अगर उसे बीच हमारी बैटरी खराब होने खराब हो गई तो शॉपकीपर या कंपनी वाले खुद आकर उसको रिपेयर करके हमको देते हैं उसका कोई चार्ज नहीं होता इसलिए हमको सबसे ज्यादा वारंटी वाली बैटरी लेना चाहिए

हमें कोशिश करके 68 महीने वाली वारंटी की बैटरी लेनी चाहिए ताकि हमारी कोई बैटरी खराब हो तो उसको रिपेयर किया जा सके 68 महीने के वारंटी देने वाली का कंपनियां है जैसे कि एक्साइड बैट्री लुमिनस ओके  आदि।

2 Invarter battry Charging time 

दूसरी जिस हमको जो देखनी है वह है चार्जिंग का समय क्यों की अगर inverter battery जल्दी चार्ज नहीं होगी तो बाद में जब विद्युत नही रहेगी और हम उसका उपयोग करना चाहेंगे तो ज्यादा समय चलेगी नहीं इसी लिए हमको चार्जिंग का खास ध्यान रखना चाइए वैसे तो हर बैट्री की चार्जिंग टाइम अलग अलग होती है जो की बैट्री की Ah पवार पर निर्धारित करता है 

बैट्री जल्दी चार्ज करने में सबसे ज्यादा यह भी मैयेने रखता है की बैट्री राखी कहा है अगर जहा बैट्री राखी है वह उसको पर्याप्त रूप में हवा मिल रही है तो बैट्री जल्दी चार्ज होने की संभावना ज्यादा होती है  साथ ही बैट्री चार्जिंग के लिए तीसरी जिस जो बैट्री चार्जिंग के लिए काम आता है वह है इन्वर्टर 

जिस तरह बैट्री की साइज अलग अलग होती है उसी तरह इनवर्टर का भी साइज अलग अलग होती है 

अगर कम्पनी की बात करे तो अभी दो ही ऐसे कम्पनी जिनकी इनवर्टर अच्छा माना जाता है मार्किट में बहुत सी कम्पनी है लेकिन अच्छे की बात करे तो लूमेनास और मैक्रोटेक है इन दो कम्पनी का इनवर्टर अच्छा होता है

3 invarter dishcharging time

तीसरी चीज जो हमको देखना है वह हमारी inverter battery का बैकअप टाइम देखना है बैकअप बैकअप टाइम सभी बैटरियों के हॉर्स पावर के हिसाब से होता है किसी का 6 घंटा किसी के साथ 8 9 10 11 ऐसे घंटा होता है साथ-साथ हमको यह भी देखना है कि हमारी बैटरी पर लोड करना पड़ रहा है आप बैटरी लेने से पहले अपने घर में कितना वोट है आपके घर में के एक पंखा लगभग 50 वाट का होता है बल्ब 10  15 25 वॉट को तो इस हिसाब से कैलकुलेट आप कर सकते हैं कि आपके घर में टोटल लोड कितना पड़ेगा बैटरी पर देखा जाए तो एक 150 हॉर्स पावर की बैटरी पर अगर 300 वाट का हॉर्स पावर लगता है तो वह लगभग 6 घंटे चलती है यह अलग-अलग कंपनी के हिसाब से थोड़ा बहुत ऊपर नीचे हो सकता है यह जो साइज में आपको बता रहा हूं टाइम बता रहा हूं यह लुमिनस बैट्री कंपनी की है 

4 बैटरी की कीमत 

आज हम जानेंगे कि 150 Ah power inverter battery कितने रुपए में मिलेगी ल्यूमिनस माइक्रो टेक और amoronकी बैटरी के बारे में बात करेंगे 

लुमिनस के 150 Ah power battery 1800 RC 36 महीना वारंटी के साथ आपको मिलेगी यह 13749 रुपए की

माइक्रोटेक 150 हॉर्स पावर की बैटरी जो की 48 मिनट की वारंटी साथ में देगी और 12 वाट इन्वर्टर के लिए उसकी कैपेसिटीहै वह वह आपको 14995 की मिल जाएगी 

इमरान 150 हॉर्स पावर 220 वोल्टेज की Best home invarter कौन सा है कम price मे Best quality ?बैटरी आपको 14225 की मिल जाएगी 

यह तीन में कंपनियां जो इंडिया की सबसे फेमस कंपनियां उनकी उनके प्राइस है आप उसको ऑनलाइन भी खेल सकते हैं आप किसी शॉप पर जाकर खरीद सकते हैं

ल्यूमिनसhttp://Microtek