India ne achieve kiya 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity ab Solar Panel honge aur bhi saste

भारत ने 2025 में एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है भारत ने 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity को पूरा कर लिया है। यह जानकारी भारत सरकार और Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) की रिपोर्ट और हाल ही में Union Minister Shri Prahlad Joshi ने यह जानकारी X (Twitter) पर पोस्ट कर के बताया है।

इस उपलब्धि का सीधा असर भारत में सोलर पैनलों की कीमतों में कमी और उनकी उपलब्धता बढ़ने पर पड़ा है 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity से अब भारतीय कंपनियां और घर के लिए सस्ते और भरोसेमंद सोलर पैनल आसानी से खरीद सकेंगे।

ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) ने यह भी conform किया है कि सभी सोलर पैनल सरकारी मानकों के अनुसार verified और subsidy eligible हों। इस कदम से यह साफ़ हो गया है कि भारत सोलर ऊर्जा में सिर्फ उपभोक्ता नही था बल्कि ग्लोबल निर्माता भी बन गया है।

100 GW Solar PV Manufacturing Capacity

भारत ने 2025 में 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity निर्माण क्षमता कैसे हासिल की, ALMM और PLI की भूमिका

भारत ने अगस्त 2025 में ऐतिहासिक 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity की उपलब्धि हासिल कि है इससे देश की 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity मॉड्यूल निर्माण क्षमता ALMM के तहत 100 GW पार हो गई है। हाल ही में MNRE ने प्रेस रिलीज़ में बताया कि यह क्षमता 2014 में सिर्फ़ 2.3 GW थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काफी तेजी से बड़ी है पह (जैसे PLI योजना) से यह बढ़कर 100 GW हो गई है। Union Minister श्री प्रद्युम्न जोशी ने इस सफलता को आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है

India ne achieve kiya 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity ये भारत की बड़ी सफलता है

100 GW Solar PV Manufacturing Capacity भारत की सौर उर्जा निर्माण क्षमता का यह सफ़र कई अलग अलग कदमों में हुआ है अगर हम जरा सा पीछे जा कर देखे तो साल 2014 में देश की घरेलू सौर मॉड्यूल क्षमता सिर्फ़ 2.3 GW थी इसके बाद जनवरी 2019 में MNRE ने बड़ा कदम उठाते हुए ALMM आदेश (Solar Modules) जारी किया इससे इंडस्ट्री को एक नई दिसा मिली।

मार्च 2021 तक इसका असर साफ़ दिखा था और जब पहली बार ALMM की पहली लिस्ट publish हुई, जिसमें लगभग 8.2 GW की क्षमता शामिल थी यह एक बहुत बड़ी achivement थी लेकिन भारत यह नही रुका और अगस्त 2025 आते-आते सरकार की रिपोर्ट ने साफ़ कर दिया कि भारत की ALMM की कहे अनुसार भारत की क्षमता 100 GW के आँकड़े को पार कर चुकी है

100 GW Solar PV Manufacturing Capacity का यह सफ़र बताता है कि भारत ने किस तरह कम समय में सौर ऊर्जा निर्माण में बड़ी सफलता हासिल की है। 2014 की सिर्फ़ 2.3 GW से लेकर 2025 की 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity तक का ये jump, इंडिया की energy independence और solar revolution का सबसे बड़ा example है

ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) का रोल

अब ज़रा आसान भाषा में समझते हैं कि ये ALMM यानी Approved List of Models and Manufacturers असल में करता क्या है। 2019 से पहले मार्केट में कौन सा solar module अच्छा है, कौन सा fake या घटिया quality का है इसका कोई proper check system नहीं था। Imported panels भी धड़ल्ले से बिक रहे थे और कई बार लोग फँस जाते थे।

लेकिन जब MNRE (Ministry of New & Renewable Energy) ने ALMM rule लागू किया, तो game ही बदल गया। अब simple funda ये है कि अगर आपका solar panel या module भारत सरकार की ALMM list में registered नहीं है, तो वो बड़े projects और subsidy वाले काम में use ही नहीं हो सकता। 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity के इस सफर में यह नियम बहुत मायने रखता है

MNRE के इस फैसले से दो बड़े फायदे हुए

  • 1. Quality check पक्का हो गया – सिर्फ वही companies ALMM में आ सकती हैं जिनके solar panels को testing labs से approval मिला हो। मतलब अब low quality panels की entry बंद
  • 2. Domestic manufacturers को boost मिला – क्योंकि सरकार ने साफ कह दिया कि “भाई subsidy वाले काम में वही panel लगेगा जो हमारी ALMM list में होगा।” इससे Indian कंपनियों को बड़ा market share मिल गया और dependence China imports पर कम होने लगा।

हाँ 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity पाने के लिए कुछ challenges भी आए। जैसे कई बार छोटे developers को लगता है कि ALMM की वजह से option कम हो गए और cost थोड़ी बढ़ गई। Import restriction से शुरुआत में supply gap आया। लेकिन overall देखा जाए तो long term में इसने India की solar manufacturing capacity को secure और stable बनाया है।

यानी आसान शब्दों में कहें तो, ALMM एक तरह का filter system है जो fake products को बाहर करता है और भरोसेमंद companies को आगे बढ़ाता है। और यही वजह है कि आज हम proudly कह सकते हैं कि India 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity cross कर चुका है।

PLI योजना और अन्य सरकारी पहलें

अब ज़रा बात करते हैं सरकार की उन योजनाओं की, जिनकी वजह से आज इंडिया की 100 GW Solar Manufacturing Capacity दुनिया में इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। सबसे पहले आती है PLI योजना (Production Linked Incentive Scheme)। 2021 में सरकार ने इस स्कीम की शुरुआत की थी ताकि देश में बड़े पैमाने पर solar PV modules का production बढ़ सके। इस योजना के तहत उन कंपनियों को financial incentive दिया जाता है, जो इंडिया में manufacturing units लगाकर high-efficiency solar panels बनाएँ।

आसान भाषा में कहें तो सरकार ने साफ message दिया कि “जो इंडिया में बनाएगा, उसी को फायदा मिलेगा।” इस वजह से कई बड़ी कंपनियाँ जैसे Adani, Reliance, और Tata Power Solar ने अपने-अपने plants लगाने का काम तेज़ कर दिया।

PLI स्कीम का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे import पर dependency घटती है। पहले इंडिया चीन जैसे देशों से भारी मात्रा में solar cells और modules import करता था, जिससे cost भी बढ़ती थी और आत्मनिर्भरता भी खतरे में थी। लेकिन PLI आने के बाद धीरे-धीरे ये dependency कम हो रही है।

इसके अलावा भी सरकार ने कई initiatives निकाले हैं — जैसे Solar Park Scheme, CPSU Scheme, Rooftop Solar Programme और सबसे ज़रूरी ALMM order। इन सबका मक़सद सिर्फ़ एक है: इंडिया को renewable energy और खासकर solar sector में global leader बनाना।

आज नतीजा ये है कि manufacturing capacity 2–3 GW से निकलकर 100 GW Solar PV Manufacturing Capacity तक पहुँच गई है। और experts का कहना है कि अगर यही speed रही तो आने वाले 2–3 सालों में इंडिया दुनिया का सबसे बड़ा solar hub बन सकता है।

आम उपयोगकर्ता और उद्योगों को फायदे

आम लोगों के लिए सबसे बड़ा फायदा ये है कि अब solar panels पहले से कहीं ज़्यादा सस्ते और आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। पहले क्या था? पैनल महंगे मिलते थे, ऊपर से ज्यादातर imported होते थे। लेकिन अब जब इंडिया खुद panels बना रहा है, तो उनकी कीमत नीचे आई है और quality भी international standard की हो गई है। इसका सीधा मतलब है – घर की छत पर solar panel लगाना अब पहले से आसान और किफायती हो गया है। और हाँ, बिजली का bill भी 70-90% तक कम हो गया है

Industries और Businesses की बात करें तो उनके लिए solar adoption अब long-term investment बन चुका है। जब कंपनियाँ खुद अपनी छतों या land पर solar plants लगाती हैं, तो उन्हें stable और सस्ती बिजली मिलती है। इससे production cost घटती है और market में उनकी competitiveness बढ़ जाती है।

इसके अलावा, domestic manufacturing बढ़ने का मतलब है कि job opportunities भी तेज़ी से बढ़ी हैं। छोटे गाँव से लेकर बड़े शहरों तक, solar sector में लाखों लोगों को employment मिल रहा है – चाहे वो panel बनाने की factory हो, installation company हो या maintenance service।

एक और बड़ा फायदा ये है कि इंडिया अब धीरे-धीरे import पर कम और export पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है। यानी आने वाले सालों में “Made in India” solar panels दूसरे देशों में भी जाएंगे, जिससे economy को boost मिलेगा।

कुल मिलाकर कहा जाए तो solar manufacturing capacity बढ़ने से आम आदमी, industries, और देश की economy – तीनों को फायदा मिल पा रहा है

Challenges and Limitations

अब जब हम बात करते हैं भारत की Solar Manufacturing Capacity की, तो सिर्फ achievements देखना ही काफी नहीं होता। असली तस्वीर तब सामने आती है जब हम चुनौतियों और सीमाओं को भी समझते हैं। सबसे पहली और बड़ी challenge है कच्चे माल (Raw Material) पर निर्भरता।

100 GW Solar PV Manufacturing Capacity

भारत अभी भी solar cells और wafers जैसे critical components के लिए काफी हद तक China पर निर्भर है। इसका मतलब यह हुआ कि global market में किसी भी तरह की price hike या supply chain disruption का सीधा असर भारत के manufacturers पर पड़ता है।

दूसरी बड़ी problem है technology gap। कई बार हमारी domestic कंपनियाँ international स्तर की high-efficiency solar cells बनाने में पीछे रह जाती हैं। इसका सीधा असर यह पड़ता है कि imported panels की efficiency ज़्यादा और cost competitive होती है, जबकि local manufacturers को market में survive करने के लिए लगातार struggle करना पड़ता है।

इसके अलावा financing और investment भी एक major limitation है। बड़ी-बड़ी कंपनियाँ तो PLI scheme और government support से फायदा उठा लेती हैं, लेकिन medium और small manufacturers को loans, subsidies और investment तक आसानी से पहुँच नहीं मिल पाती।

और हाँ, एक और issue है installation और adoption rate। भले ही manufacturing capacity बढ़ रही है, लेकिन ground-level पर projects में delay, policy clarity की कमी और bureaucratic hurdles भी growth को slow कर देते हैं।

यानी साफ है कि भारत ने solar manufacturing में भले ही 100 GW milestone achieve कर लिया हो, लेकिन अभी भी raw material dependence, technology upgradation, financial support और policy hurdles जैसे मुद्दों को हल करना बाकी है।

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