आज कल भारत में सोशल मीडिया पर Petrol Capsule से रिलेटेड कई वीडियो वायरल हो रही है और लोगों द्वारा या सोशल मीडिया पर बहुत सर्च किया जा रहा है कि यह सच है या बस Viral Scam है लोग जानना चाहते है कि वीडियो में बताए जा रहे 20 30 रुपया वाला Petrol Capsule से क्या सच में इससे लंबी दूरी तय की जा सकती है क्या इससे Future में Petrol की समस्या को खत्म कर सकता है आज हम इसी बारे में जानने की कोशिश करेंगे Petrol Capsule का दावा कितना सच है और कितना झूठ?
Petrol Capsule का असली सच क्या है क्या यह कोई नया Scam है क्या ऐसी कोई तरीका है जिससे Petrol के खर्च को कम किया जा सके?
Instagram, Facebook,YouTube, इन सोशल मीडिया प्लेटफॉम पर अपने कभी न कभी एक वीडियो जरूर देखी होगी जिसमें बताया जा रहा है कि छूटे से कैप्सूल को petrol टंकी मे डालो और टंकी फूल हो जाती है क्या सच में एसा Petrol Capsule भारत में आ चुका है अगर यह सच है तो भारत सहित पूरे दुनिया के लिए यह वरदान साबित हो सकता है
लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई पेट्रोल कैप्सूल जैसा कोई फ्यूल मौजूद है या फिर यह सिर्फ सोशल मीडिया का एक और वायरल स्कैम है इस लेख में हम पूरे तथ्यों और विज्ञान के आधार पर सच्चाई समझेंगे
Petrol Capsule वायरल वीडियो और पोस्ट में Petrol Capsule को एक छूट टेबलेट या गोली की सकल में दिखाया जा रहा है और दावा किया गया है कि यह कैप्सूल पेट्रोल की जगह काम कर सकता है इस कैप्सूल को petrol टैंक में डालते ही यह यह पेट्रोल बन जाता है और इसकी कीमत बहुत कम है और यह लंबी दूरी भी आसानी से तय कर सकता है साथ यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित बताया जा रहा है
यह वीडियो जब से सोशल मीडिया पर वायरल हुई है तब से हर कोई इसके बारे में अपनी राय बता रहा है कुछ लोग कह रहे है कि यह New Technology है तो कुछ इससे बड़ी तेल कंपनियों द्वारा छुपाई गई खोज कह रहे है और यही वजह है कि लोगों का भ्रम और इसकी चर्चा और बढ़ गई है
Petrol Capsule वायरल वीडियो इतना वायरल क्यों हो रहा है? सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो वायरल उनके के पीछे कई वजह होती है पहला कारण है पेट्रोल और डीजल की महंगाई भारत में ईंधन की कीमतें आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती है जब कोई सस्ता विकल्प दिखता है तो लोग तुरंत आकर्षित हो जाते है
दूसरा कारण सोशल मीडिया का एल्गोरिदम ऐसे चौंकाने वाले और अविश्वनीय दावे लोगो के द्वारा ज्यादा शेयर किए जाते है क्योंकि क्या सच है यह जानने के लिए लोग वीडियो को आगे बढ़ते है जिससे यह वायरल होती है और इन पर चर्चा तेज होती है
तीसरा कारण वैज्ञानिक जानकारी की कमी होना ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि Petrol ईंधन कैसे काम करता है और इस लिए किसी भी नए दावे पर जल्दी यकीन कर लेते है

Petrol Capsule से पेट्रोल बनना क्या संभव है क्या इससे सच में पेट्रोल जैसे ईंधन का खर्चा कम किया जा सकता है?
अब सबसे ज़रूरी सवाल यह है कि यह Petrol Capsule विज्ञान के अनुसार हो पाना संभव है Petrol एक high Energy Density तरल वाला ईंधन होता है इंजन में जलने के लिए सही मात्रा में तरल ईंधन चाहिए हवा के साथ सही मिश्रण चाहिए नियंत्रित तापमान और दबाव चाहिए होता है
एक छूटा सा Petrol Capsule इन सभी शर्तों को पूरा नहीं कर सकता अगर पेट्रोल को ठोस रूप में बदला जाए तो भी उसे इंजन में इस्तेमाल करने के लिए दोबारा तरल बनाना पड़ेगा जो गाड़ी के सामान्य इंजन सिस्टम में संभव नहीं है आज तक दुनिया में किसी भी वैज्ञानिक संस्था ऑटोमोबाइल कंपनी या रिसर्च जर्नल ने ऐसे पेट्रोल कैप्सूल को मान्यता नहीं दी है
अगर पेट्रोल कैप्सूल सच होता तो क्या होता?
चलो मान लेते है एक पल के लिए सोचें कि पेट्रोल कैप्सूल सच में काम करता है तो इससे तेल कंपनियों का पूरा बिजनेस मॉडल बदल जाएगा और पेट्रोल पम्प की जरूरत खत्म हो जाएगी और सरकारी tax सिस्टम पूरी तरह बदल जायेगा और इस दावे से पूरी दुनिया की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री हिल जाएगी
अगर यह बात सच होती तो अब तक इंटरनॅशनल मिडिया पर ज़रूर आ जाती साथ इसका वैज्ञानको द्वारा इस बात को पब्लिक की जाती और दुनिया भर की सरकारे कम्पनिया भी इस बात को बता बता देतीं न की सिर्फ इंस्टाग्राम रील्स और whatsapp इसकी बात होती
दूसरा सवाल यह है और लोगो में यह बहुत आम है की हो सकता है क्या यह कोई नया फ्यूल या इनोवेशन है? लेकिन यह सच नहीं है हां इसके अलावा है हाइड्रोजन फ्यूल बायोफ्यूल सिंथेटिक फ्यूल इलेक्ट्रिक वाहन इन सब पर सालो से रिसर्च चल रही है और Petrol capsule जैसा कोई opstions अभी इस लिस्ट में शामिल नहीं है
ऐसे वायरल ट्रेंड्स से खतरा क्या है?
इस तरह के वायरल दावों पर भरोसा करना सिर्फ भ्रम नहीं बल्कि खतरनाक भी हो सकता है अगर कोई इंसान इस बात को सच मन ले और किसी के बताए गए केमिकल को टैंक में डाल दे और इसको इंजन के साथ प्रयोग करे तो इससे इंजन खराब हो सकता है आग लग सकती है और आर्थिक नुकसान होने के भी चांस है कई बार ऐसे वायरल ट्रेंड्स के पीछे फ्रॉड और स्कैम भी होते हैं जहां लोगों से पैसे ऐंठे जाते हैं
सोशल मीडिया पर किसी वीडियो का वायरल होना हर बार सच नहीं होता है आज का सबसे बड़ा भ्रम यही है कि जो चीज़ वायरल है वह सही है जबकि हकीकत यह है कि सोशल मीडिया पर अफवाहें भी वायरल होती हैं झूठ भी वायरल होता है और अधूरी जानकारी भी वायरल होती है समझदार वही है जो हर वायरल दावे को सवालों की कसौटी पर परखे