China Creates History World’s First Megawatt Airborne Wind Turbine Generates Power from the Sky

China ने अपनी नई टेक्नोलॉजी का नया रूप दुनिया को दिखा कर चौका दिया है जरा सोच कर देखिए जब हम हवा से बिजली बनाने की बात करते है तो हमारे दिमाग में सबसे पहले ज़मीन पर लगी ऊँची पवन चक्कियाँ (Wind Turbines) आती हैं लेकिन जरा सोच कर देखिए अगर ये टरबाइन ज़मीन पर नहीं बल्कि आसमान में उड़ते हुए बिजली बनाएँ तो यही कर दिखाया है चीन ने

चीन ने हाल ही में दुनिया का पहला मेगावाट लेवल पर Airborne Wind Turbine (हवाई पवन टरबाइन) बनाया है और इसको सफलतापूर्वक टेस्ट भी किया है यह टरबाइन 1000 मीटर की ऊंचाई से बिजली पैदा करता है इसे Flying Power Plant यानी आसमान में उड़ता पावर स्टेशन भी कहा जा रहा है

China का Airborne Wind Turbine खोज सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है बल्कि भविष्य की दिशा में एक नया कदम है अब तक पवन ऊर्जा का उत्पादन एक सीमित ऊंचाई तक ही होता था लेकिन Airborne Wind Turbine से दुनिया को यह पता चल है की ऊंचाई जितनी बढ़ेगी उर्चा उतनी ही सस्ती और आसानी से मिलेगी चीन ने Airborne Wind Turbine का सफलतापूर्वक टेस्ट करके यह साबित कर दिया है कि आने वाले दशक में ऊर्जा उत्पादन का भविष्य सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में भी लिखा जाएगा।

Airborne Wind Turbine क्या है

Airborne Wind Turbine दुनिया की नई तकनीकों में से एक है और यह अभी बहुत चर्चा में भी है इस तकनीक में पावन टरबाइन को जमीन पर नही बल्कि बल्कि हवा में उड़ाया जाता है ताकि ऊंचाई पर चलने वाली तेज़ और सीधी हवा से बिजली बनाई जा सके

आम तौर जो हम Wind Turbine देखते है उनको जमीन पर लगाया जाता है और उनकी ऊंचाई 100 से 200 मीटर तक होती है लेकिन ऊंचाई बढ़ने पर हवा का वेग अधिक स्थिर और शक्तिशाली हो जाता है इसी idea को आधार बनाकर वैज्ञानिकों ने Flying Wind Turbine का निर्माण किया है यानी एक ऐसा Flying Wind Turbine जो 1000 मीटर या उससे अधिक ऊँचाई पर उड़ते हुए बिजली बना सके

Airborne Wind Turbine को हवा में कैसे उड़ता है?

Airborne Wind Turbine को हवा में रखने के लिए दो तरीकों का उपयोग होता है

1. Airship-based System Airborne Wind Turbine को हवा में रखने के लिए जो पहला तरीका उपयोग होता है वह है Airship-based System इसमें टरबाइन को एक बड़े helium filled एयरशिप से जोड़ा जाता है जो गुब्बारे की तरह ऊपर उड़ता है और टरबाइन हवा से घूमकर बिजली बनाता है और फिर यह बिजली एक conductive cable के ज़रिए ज़मीन पर भेजी जाती है

2. Kite-based System इस सिस्टम में एक बड़े kite (पतंग) जैसी संरचनाएं हवा की दिशा में उड़ती हैं और अपनी गतिज ऊर्जा को बिजली में बदलती हैं

Airborne Wind Turbine का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ऊँचाई पर मौजूद तेज़ और स्थिर हवाओं का सीधा उपयोग करता है जिससे बिजली उत्पादन की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है इसको आसान भाषा ऐसे समझ सकते है जहाँ सामान्य टरबाइन 200 मीटर की ऊँचाई पर 6–8 m/s की हवा पकड़ते हैं वहीं Airborne Wind Turbine 1000 मीटर पर 12–15 m/s तक की तेज़ हवा से ऊर्जा पैदा कर सकता है

Airborne Wind Turbine

चीन का पहला मेगावाट हवाई पवन टरबाइन की खासियत क्या है और क्या यह पवन ऊर्जा का भविष्य बदल सकता है?

चीन ने हाल ही में जिस तकनीक का सफल परीक्षण किया है और उसे ऊर्जा विशेषज्ञ भविष्य की पवन क्रांति (Wind Revolution) कहा जा रहा हैं इस प्रोजेक्ट का नाम है S1500 Airborne Wind Turbine रखा गया है जिसे चीन के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है

यह दुनिया का पहला ऐसा मेगावाट हवाई पवन टरबाइन है जो लगभग 1000 मीटर (1 किलोमीटर) की ऊँचाई पर उड़कर बिजली उत्पन्न करता है सामान्य पवन टरबाइन ज़मीन से जुड़ी होती हैं लेकिन यह पूरी तरह Airship-based system है यानी यह एक बड़े helium भरे गुब्बारे की तरह आसमान में तैरती है जिसमें बिजली पैदा करने के लिए कई छोटे टरबाइन लगे हैं

चीन की S1500 Airborne Wind Turbine मुख्य विशेषताएँ?

चीन के इस S1500 Airborne Wind Turbine की सबसे बड़ी खासियत है इसका डिजाइन और उर्चा क्षमता यह टरबाइन हवा में उड़ते हुए 1 मेगावाट से अधिक बिजली आसानी से उत्पन्न करने में सक्षम है इसे लगभग 1000 मीटर की ऊँचाई पर तैनात किया जाता है जहाँ हवा ज़्यादा तेज़ और स्थिर होती है इसका ढाँचा एक helium-filled airship जैसा होता है

इस टरबाइन में एक भी बल्कि 12 छोटे टरबाइन लगे होते हैं जो हवा की स्पीड से चलते है जो मिलकर बिजली बनाते हैं। यह पूरा सिस्टम एक मज़बूत केबल के ज़रिए ज़मीन से जुड़ा जाता है जो न केवल बिजली को नीचे भेजता है बल्कि एयरशिप को हवा नियंत्रित करने का काम भी करता है जिससे एयरशिप का बैलेंस न खराब हो

चीन की इस S1500 Airborne Wind Turbine में लगे advanced sensors और AI based control systems हवा की दिशा और गति को लगातार मॉनिटर करते हैं जिससे टरबाइन अपनी स्थिति और दिशा अपने आप कंट्रोल कर लेता है। यही वजह है कि यह उड़ता हुआ टरबाइन हर मौसम में अधिकतम दक्षता (efficiency) के साथ लगातार बिजली उत्पन्न करता रहता है

इस Airborne Wind Turbine सबसे अच्छे बात यह है कि इसको कही पर भी आसानी से लगाया जा सकता है चाहे वहाँ ज़मीन ऊबड़-खाबड़ हो या समुद्र के ऊपर हो और अगर इसकी तकनीक की बात करे तो यह तकनीक पारंपरिक टरबाइनों से 2 3 गुना ज़्यादा स्थिर बिजली उत्पन्न कर सकती है और इस टरबाइन को बनाने और इंस्टॉल करने का खर्च wind turbine के मुकाबले बहुत कम होता है चीन ने इस प्रोजेक्ट के सफल परीक्षण के बाद यह संदेश दिया है कि वह सिर्फ दुनिया की फैक्ट्री ही नहीं बल्कि ग्रीन एनर्जी इनोवेशन का लीडर बनने की दिशा में बढ़ रहा है

Airborne Wind Turbine setup

पारंपरिक और हवाई पवन टरबाइन में क्या अंतर है और कौन बेहतर है?

जब हम पवन ऊर्जा की बात करते हैं तो सबसे पहले हमारे दिमाग में वही बड़े बड़े टावर और घूमते हुए ब्लेड आते हैं जो ज़मीन पर लगे होते हैं इन्हें ही पारंपरिक पवन टरबाइन कहा जाता है ये टरबाइन लगभग 80 120 या 200 मीटर की ऊँचाई पर लगाए जाते हैं और यह हवा की गति पर निर्भर करते हैं लेकिन समस्या यह है कि ज़मीन के पास हवा अक्सर अस्थिर होती है मतलब कभी तेज़ कभी धीमी

अब ज़रा सोचिए अगर यही टरबाइन आसमान में उड़ा दिया जाए तो कैसा होगा और यही सोच चीन के वैज्ञानिकों ने हकीकत में बदल दी है Airborne Wind Turbine यानी हवा में उड़ने वाला टरबाइन धरती से लगभग 1000 मीटर की ऊँचाई पर उड़ता है जहाँ हवा ज़्यादा तेज़ और स्थिर होती है इससे यह पारंपरिक टरबाइन की तुलना में ज़्यादा बिजली बना सकता है

इस हवाई टरबाइन में helium-filled airship होता है जो इसे आसमान में तैरने में मदद करता है इसके साथ लगे 12 छोटे टरबाइन हवा की ताकत को पकड़कर बिजली बनाते हैं जबकि पारंपरिक टरबाइन को बड़ी ज़मीन भारी ढांचा और रखरखाव की ज़रूरत होती है हवाई टरबाइन को बस एक केबल सिस्टम चाहिए जो इसे ज़मीन से है और बिजली नीचे भेजता है

इस Airborne Wind Turbine में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें लगे AI based sensors हवा की दिशा और गति के हिसाब से अपने आप टरबाइन की स्थिति को एडजस्ट कर लेते हैं यानी यह अपने आप स्मार्ट होकर काम करता है जबकि पुराने टरबाइन में यह सुविधा नहीं होती

Airborne Wind Turbine बनाने मे चीन का मकसद और भविष्य की योजना क्या है?

चीन हमेशा से नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी रहा है चाहे वो सोलर पैनल हों या पवन ऊर्जा के प्रोजेक्ट लेकिन अब चीन ने एक कदम और आगे बढ़कर यह दिखा दिया है कि उसका लक्ष्य सिर्फ़ ज़मीन पर नहीं बल्कि अब आसमान में भी ऊर्जा पैदा करना है

इस मेगावॉट Airborne Wind Turbine का असली मकसद है ऐसे क्षेत्रों में भी बिजली पहुँचाना जहाँ पारंपरिक टरबाइन या सोलर सिस्टम लगाना मुश्किल है जैसे पहाड़ी इलाके समुद्री क्षेत्र या आपदा ग्रस्त ज़ोन हो

चीन के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के ज़रिए वे भविष्य में ऐसे फ्लाइंग विंड फार्म्स बना सकेंगे जो लगातार बिजली पैदा करेगा बिना किसी फिजिकल फाउंडेशन के या बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के यह Airborne Wind Turbine 24 घंटे उड़ सकता है और जब हवा बहुत तेज़ हो जाए या मेंटेनेंस की ज़रूरत पड़ती है तो इसे केबल के ज़रिए नीचे लाया जा सकता है

दिखा जाए तो भविष्य की योजना के तौर पर चीन अब इस Airborne Wind Turbine तकनीक को और बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है चीन का अगला टारगेट 5 मेगावॉट से भी ज़्यादा क्षमता वाले हवाई टरबाइन विकसित करना और समुद्र के ऊपर तैरते हुए विंड फार्म्स बनाना है

चीन आने वाले समय में इस पर काम करेगा और इस तकनीक को पाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तकनीक को एक्सपोर्ट करना ताकि अन्य देश भी इसका इस्तेमाल कर सकें अगर आसान भाषा में कहे तो सब मिला कर चीन का यह कदम सिर्फ एक तकनीकी प्रयोग नहीं होगा बल्कि ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में एक क्रांति काम साबित होगा

Airborne wind turbine

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