अभी आप जिस पर यह लेख पढ़ रहे है ओह सिर्फ एक डब्बा होता अगर दुनिया में इंटरनेट न होता तो जहा भारत अभी 5G internet में खुद को ठीक से विकसित नही कर पाया है आज के समय में पूरी दुनिया में नई technology विकसित हो रहे है अभी हाल ही में 1.02 Pbps हाई स्पीड इंटरनेट बनाया है जिसने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है आज के इस लेख में जानेंगे की यह कैसे हुआ 1.02 Pbps क्या है इसका आम इंसान पर क्या असर होगा और भारत कब होगा तैयार इस लेख में हम इसी के बारे में बार करेंगे

1.02Pbps हाई स्पीड इंटरनेट क्या है। यह कैसे काम करता है 2025
जापान जो अपनी टैक्नोलॉजी और नए नए अविष्कार के लिए पूरी दुनिया में फेमस है उसने अभी हाल ही में 1.02 Pbps यानी 1.02 Pbps प्रति सेकेंड का इंटरनेट अविष्कार किया है यह अभी तक का सबसे तेज़ स्पीड वाला इंटरनेट है
इस तकनीक को जापान के NICT (National Institute of Information and Communications Technology) बनाया है उन्होंने इसको एक खास तरह के फाइबर ऑप्टिक सिस्टम का उपयोग करके बनाया है साथ ही इसमें 38 कोर और मॉल्टिवेव का इस्तेमाल किया गया है
Pbps क्या होता है?
Pbps (petabits per second) यह एक डेटा ट्रांसफर यूनिट होती है जिसकी हेल्प से हम अपने डेटा को दूसरे तक भेजते है 1 Pbps = 1,000 terabits par second = 1,000,000 Gigabits per second
यह स्पीड इतनी तेज़ है की हर एक सेकेंड में 1 million GB से भी ज्यादा डेटा इसकी मदद से ट्रांसफर किया जा सकता है अगर आसान भाषा में कहे तो आप इस स्पीड से आप कुछ सेकंड में netfilx, YouTube, और amozon prime का सारा कंटेंट डाउनलोड कर सकते है
Bit क्या होता है?
Bit (Binary dight) यह एक कंप्यूटर भासा है और यह कंप्यूटर की सबसे छोटा हिस्सा होता है यह सिर्फ दो चीजों को दर्शाता है 0 या 1 बस अगर कोई डेटा 101 है तो इसमें 3 bits हुए कंप्यूटर में किसी भी शब्द को देखने के लिए bit की जरूरत होती है जैसे की एक शब्द है A B C अब इसको कंप्यूटर में दिखने के लिए bit ki ज़रूरत होती है
और जब 8 बिट्स एक साथ आते है तो वोह मिलकर 1 byte बनाते है फिर आगे चल कर जब 1000 बिट्स इक्कठा होते है तो ओह एक किलोबाइट्स बनता है जिसको हम KB भी कहते है उसमे हम एक छोटा डॉक्यूमेंट्स रख सकते है इसी तरह जब 1000 KB होता है तो उसको 1 मेगाबाइट MB कहते हैं इसमें अच्छी क्वॉलिटी के फोटो या mp3 गाने समा सकते है
फिर इसके बाद आता है 1000 GB यानि 1 टेराबाइट Tb यह हाईड्राइव या SSD जैसे बड़े इस्टोरेज में इस्तेमाल किया जाता है और फिर जब एक हजार टेराबाइट को मिलते है तो बनता है 1 पेटाबाइट्स pb यह एक बहुत बड़ी मात्रा को दर्शाता है यह ज्यादातर बड़े डेटा सेंटर में इस्तमाल होता है अभी जैसे जैसे दुनिया आधुनिक और एडवांस हो रहे है वैसे वैसे इनकी जरूरत भी बढ़ रहे है
यह तकनीक कैसे काम करती है?
1.02 Pbps इंटरनेट स्पीड पाने के लिए वैग्नानिको ने एक खास तरह की टेक्नालॉजी का इस्तेमाल किया है जहां आम फाइबर में एक कोर होता है तो वही इस 1.02 Pbps स्पीड के लिए 38 कोर का इस्तेमाल हुआ है जिससे एक साथ कई लेन में डेटा ट्रांसफर किया जा सकता है
1.02 Pbps इन्टरनेट स्पीड जो की दुनिया का सबसे फास्ट इंटरनेट है इसको जापान के NICT (National Institute of Information and Communications Technology) ने बनाया है और पूरी दुनिया को चौका दिया है लेकिन यह तकनीक अभी सिर्फ रिसर्च लैब तक सीमित है और यह अभी बहुत महंगी है लेकिन जैसे जैसे समय बीतेगी वैसे ही इसकी कीमत भी काम होगी और यह बड़े शहरों कॉरपोरेट हब और फिर आम घरों तक पहुंचेगी।
कोर क्या होता है
कोर का मतलब होता है वह रास्ता जिससे डेटा प्रकाश के रूप में फाइबर केबल के अंदर यात्रा करता है जब हम फाइबर ऑप्टिक केबल की बात करते है तो यह एक पतली नली जैसी होती है जिसके बीच एक सीधी लाइन होती है और यही कोर होता है जिसमे 1.02 Pbps इन्टरनेट डाटा ट्रांसफर होता है

कोर किस चीज़ का बना होता है
फाइबर ऑप्टिक का कोर आम तौर पर दो चीजों का बना होता है पहला ग्लास (Silica Glass / सिलिका कांच) का बना होता है और दूसरा प्लास्टिक (Plastic Optical Fiber – POF) का बना होता है इन दोनो में क्या फर्क होता है।
ग्लास (Silica Glass / सिलिका कांच) क्या होता है?
फाइबर ऑप्टिक कोर में जो सबसे ज्यादा उपयोग होता है वह है ग्लास सिलिका यह का बना होता है यह बहुत शुद्ध और पारदर्शी कांच होता है जिसे विज्ञानिको ने उच्च गति से डेटा ट्रांसफर करने के लिए डिजाइन किया है इस ग्लास से बने कोर की सबसे खास बात यह है की इसमें सिग्नल लाइन बहुत कम नुकसान से गुजर जाता है
यानी डेटा बिलकुल न के बराबर नुकसान होता है यह कोर वहा ज्यादा इस्तेमाल होता है जहा से हमको लंबा इंटरनेट केबल बिछाने की जरूरत होती जैसे की समुंदर के अंदर यह न सिर्फ मजबूत होती है बल्कि यह वातावरण में होने वाले बदलाओं जैसे गर्मी नामी दबाओ इनको भी घेलने में सक्षम होती है यही वजह है जब बात होती है हाई स्पीड और लॉन्ग डिस्टेंस इंटरनेट ट्रांसमिशन की तो सिलिका ग्लास को 1.02 Pbps स्पीड के लिए सबसे भरोसेमंद कोर माना जाता है
प्लास्टिक ऑप्टिकल फाइबर (Plastic Optical Fiber – POF) क्या होता है?
पलास्टिक ऑप्टिकल फाइबर यह कोर प्लास्टिक की बनी होती है न की कांच होती है यह गिलास फाइबर कोर के मुकाबले सस्ती और और काफी लचीली होती है इनका इस्तेमाल खास कर काम दूरी और घरेलू कनेक्शन में होता है POF से बनी केबल को मुड़ना और इंस्टाल करना बहुत आसान होता है
इस कोर का सबसे बड़ा नुकसान यह है की इसमें गुरजने वाले प्रकाश लाइट सिग्नल लॉस और डेटा लॉस ज्यादा होता है जिससे यह लंबी दूरी और हाई स्पीड के लिए उतना लायक नही होता है यह टीवी कनेक्शन, छोटे ऑफिस नेटवर्किंग, ऑटोमोबाइल और लाइटिंग सिस्टम जैसे हल्के कामों में उपयोग होता है
क्या भारत इसके लिए तकनीकी रूप से तैयार है?
भारत तकनीकी रूप से इस स्पीड को अपनाने की दिसा में बढ़ रहा है लेकिन अभी 1.02 Pbps स्पीड के लिए पूरी तरह तैयार नही है अभी भारत में jio एयरटेल और भी दूसरी कम्पनी जो भारत के छोटे गांव और कस्बों में 5G इंटरनेट पर काम कर रहे है तो वही भारत सरकार 6G Network पर काम कर रही है लेकिन अभी भी हर जगह 5G नेटर्वक ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है
जापान जैसे 1.02 Pbps की स्पीड के लिए हम आधुनिक फाइबर ऑप्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और उच्च गुणवत्ता वाले टार्नमिशन सिस्टम और मल्टी कोर टैक्नोलॉजी की जरूरत है हाला की भारत सरकार इन पर काम कर रही है
अगर देखा जाए तो भारत में अभी ज्यादातर फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क सिंगल-कोर या ड्यूल-कोर तकनीक पर आधारित हैं, जबकि जापान जैसी स्पीड के लिए 4-core या उससे अधिक एडवांस सिस्टम चाहिए। इसके अलावा, भारत में अधिकांश डिवाइस और नेटवर्क इक्विपमेंट अभी उस स्तर के नहीं हैं जो 1 Pbps स्पीड को सपोर्ट कर सकें। नेटवर्क ट्रैफिक मैनेजमेंट, डाटा सिक्योरिटी, और हार्डवेयर अपग्रेडेशन जैसी समस्या अभी भी है
क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर के मामले में भारत तरक्की कर रहा है, और कई ग्लोबल कंपनियों ने भारत में इन्वेस्ट करना शुरू किया है। भारत के पास टैलेंट और इंजीनियरिंग स्किल्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन रिसर्च और इनोवेशन के लिए जरूरी फंडिंग, नीति में तेजी, और इंडस्ट्री-अकैडमिक कोलैबोरेशन की आवश्यकता है
1.02 Pbps हाई-स्पीड इंटरनेट के फायदे
1.02 Pbps (Petabits per second) की स्पीड इतनी तेज़ होती है कुछ सेकंड में ही 100,000 से भी ज़्यादा HD फिल्में डाउनलोड कर सकते हैं। इससे डेटा ट्रांसफर बहुत तेज़ी से कर सकते है स्ट्रीमिंग, या साइंटिफिक रिसर्च हो कई गुना तेजी से हो सकेगा
Machine Learning और AI मॉडल्स को ट्रेन करने में भारी मात्रा में डेटा की ज़रूरत होती है। 1.02 Pbps से यह काम सेकंड्स में हो सकता है, जिससे नई टेक्नोलॉजीज और इनोवेशन तेज़ी से आएँगी
रिमोट एरिया में भी बिना किसी लैग के ऑनलाइन क्लासेज़, ऑपरेशन्स या डॉक्टर-कंसल्टेशन संभव हो पाएँगे। इससे स्वास्थ्य और शिक्षा में आसानी आएगी भविष्य में जब इंटरनेट उपयोग बढ़ेगा, तब ऐसी स्पीड ज़रूरी होगी ताकि ट्रैफिक मैनेजमेंट स्मूथ बना रहे और सिस्टम डाउन न हो
1.02 Pbps हाई-स्पीड इंटरनेट के नुकसान
इस स्तर की स्पीड को प्राप्त करने के लिए अल्ट्रा-एडवांस ऑप्टिकल फाइबर, स्पेशलाइज्ड राउटर्स, और डेटा सेंटर्स की ज़रूरत होती है, जो बहुत ही महंगे हैं। इससे देश के सभी हिस्सों में इसे लागू करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो सकता है
1.02 Pbps जैसी तेज़ डेटा स्पीड के साथ अगर नेटवर्क हैक हो जाए तो भारी मात्रा में संवेदनशील जानकारी बहुत तेज़ी से लीक हो सकती है। सुरक्षा उपायों में थोड़ी सी लापरवाही बड़े डेटा ब्रीच का कारण बन सकती है
आज की अधिकतर डिवाइस और सिस्टम्स इतने तेज़ इंटरनेट को सपोर्ट नहीं करते। इससे आम उपयोगकर्ता के लिए यह स्पीड ‘बेमतलब की लग्ज़री’ बन सकती है जब तक उनका हार्डवेयर अपग्रेड न हो इस तकनीक को बनाए रखने वाले डेटा सेंटर्स को भारी बिजली की ज़रूरत होती है, जो अगर रिन्यूएबल न हो तो पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है
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